भारत का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से नवंबर तक के आठ महीने में बढ़कर 9.77 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यह जानकारी सरकार ने शुक्रवार को साझा की. सरकार ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में राजकोषीय घाटा FY25-26 के निर्धारित लक्ष्य का 62.3% हो गया है, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह 52.5% था. केंद्र का राजस्व घाटा अप्रैल-नवंबर अवधि में 3.57 लाख करोड़ रुपये रहा, जो कि पूरे वित्त वर्ष के लक्ष्य का 68.2% है, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 61.5% था.
FY26 में भारत सरकार का आठ महीनों का खर्च और प्राप्तियां
FY26 के पहले आठ महीनों में सरकार का कुल खर्च 29.25 लाख करोड़ रुपए रहा है, जो कि FY26 के लक्ष्य का 57.8% है. यह पिछले साल समान अवधि में 56.9% था. समीक्षा अवधि के कुल खर्च में से 6.58 लाख करोड़ रुपए पूंजीगत खर्च रहा है, जो कि वार्षिक लक्ष्य का 58.7% है. पिछले साल समान अवधि में यह आंकड़ा 46.2% था. कुल राजस्व खर्च में से 7.45 लाख करोड़ रुपए ब्याज भुगतान और 2.88 लाख करोड़ रुपए सब्सिडी भुगतान पर खर्च किए गए हैं. FY25-26 की अप्रैल-नवंबर अवधि में कुल प्राप्तियां 19.49 लाख करोड़ रुपए रही, जो कि इस वित्त वर्ष के लक्ष्य का 55.7% है.
FY26 में कर आय और राज्य सरकारों को ट्रांसफर राशि
इसमें 13.93 लाख करोड़ रुपए की कर आय, 5.16 लाख करोड़ रुपए की गैर-कर आय और 38,927 करोड़ रुपए की गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां शामिल हैं. सरकार ने बताया कि इसी अवधि में भारत सरकार ने राज्य सरकारों को कर के हिस्से के रूप में 9.36 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 1.24 लाख करोड़ रुपए अधिक है.

