RBI Policy Update: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और देश में पूंजी प्रवाह को मजबूत करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं. शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एनआरआई, ओसीआई, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से जुड़े कई बड़े फैसलों की जानकारी दी. केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन कदमों से विदेशी निवेश आकर्षित करने, निर्यात को बढ़ावा देने और देश के भुगतान संतुलन को मजबूत करने में मदद मिलेगी.
NRI और OCI निवेशकों को मिली बड़ी राहत
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की कि शेयर बाजार में कारोबार होने वाले इक्विटी साधनों में बिना सेबी पंजीकरण के निवेश करने के लिए एनआरआई (अनिवासी भारतीय) और ओसीआई (भारतीय मूल के विदेशी नागरिक) की निवेश सीमा बढ़ाई जा रही है. उन्होंने कहा कि यही सुविधा अब सभी व्यक्तिगत विदेशी निवासी व्यक्तियों (PROI) को भी एनआरआई और ओसीआई के समान उपलब्ध कराई जाएगी.
PSU के लिए विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा जारी रहेगी
गवर्नर ने कहा, “सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) द्वारा बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) को प्रोत्साहित करने के लिए 30 सितंबर 2026 तक रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. इसके अलावा, अधिकृत डीलर (एडी) बैंकों को 3 से 5 वर्ष की नई एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट जुटाने के लिए पूरी हेजिंग लागत वहन करने की समान सुविधा भी 30 सितंबर 2026 तक दी जाएगी.”
सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश को मिलेगा बढ़ावा
विदेशी पूंजी आकर्षित करने के उद्देश्य से आरबीआई ने पूरी तरह सुलभ मार्ग (FAR) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों के लिए निर्दिष्ट प्रतिभूतियों के दायरे का विस्तार करने का फैसला किया है. इसके तहत 15 वर्ष, 30 वर्ष और 40 वर्ष की अवधि वाली सभी नई सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) को शामिल किया जाएगा.
FPI निवेश पर कई सीमाएं हटाई जाएंगी
संजय मल्होत्रा ने कहा कि सामान्य मार्ग (जनरल रूट) के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के निवेश पर लागू अल्पकालिक निवेश, निवेश एकाग्रता और व्यक्तिगत प्रतिभूतियों से जुड़ी सीमाओं को भी हटाया जा रहा है. उन्होंने कहा, “ये कदम और सरकार द्वारा शुक्रवार सुबह घोषित कर लाभ (टैक्स बेनिफिट) सरकारी उधारी के लिए विदेशी पूंजी आकर्षित करने में मदद करेंगे.”
निर्यातकों को भी मिलेगी राहत
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि निर्यात आय की प्राप्ति के लिए समयसीमा को फिर से 9 महीने करने का प्रस्ताव रखा गया है. उन्होंने कहा, “इन उपायों से देश के भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) को मजबूती मिलने की उम्मीद है. साथ ही हम निर्यात को बढ़ावा देने और पूंजी प्रवाह आकर्षित करने के लिए आगे भी आवश्यक नीतिगत बदलाव करते रहेंगे.”
संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि भारत की विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है. उन्होंने कहा, “हम किसी विशेष विनिमय दर या उसकी किसी सीमा को लक्ष्य नहीं बनाते. विनिमय दर का निर्धारण बाजार की ताकतों के आधार पर होने दिया जाता है.”
बाजार में अत्यधिक अस्थिरता पर रखी जाएगी नजर
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कई बार बढ़ी हुई अनिश्चितता के दौरान सट्टेबाजी के दबाव के कारण बाजार में ऐसे उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं, जो आर्थिक बुनियादी कारकों के अनुरूप नहीं होते और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं. आरबीआई गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक का उद्देश्य बाजार द्वारा तय किए गए स्वाभाविक बदलावों को रोकना नहीं है, लेकिन अत्यधिक अस्थिरता और अव्यवस्थित बाजार गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
वित्तीय स्थिरता बनाए रखने पर रहेगा फोकस
उन्होंने जोर देकर कहा कि आरबीआई वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनाए रखने और अनावश्यक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए सतर्क बना रहेगा. केंद्रीय बैंक का फोकस विदेशी निवेश आकर्षित करने, वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाने और भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने पर रहेगा.
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