ईरान में हो रही है तख्तापलट की कोशिश, खुफिया एजेंसी ने पेश किए सबूत  

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Iran Protest: ईरान में पिछले पांच दिनों से बवाल मचा हुआ है, जिसमें अली खामेनेई की सरकार ने पश्चिमी देशों का विरोध बताया है, और खुफिया एजेंसी इससे संबंधि कुछ सबूत भी मीडिया के सामने पेश किए है, जिसमें बॉर्डर पार से आए हथियार और विद्रोही एजेंट शामिल हैं.

दरअसल, ईरान का कहना है कि पश्चिमी देश आंदोलन की आड़ में इस्लामिक शासन को सत्ता से हटाना चाहते हैं. मीडिया के मुताबिक, खामेनेई आर्मी ने विरोध प्रदर्शन को हवा देने वालें सात लोगों को पकड़ा है, जो अमेरिका और इजरायल के इशारे पर काम कर रहे थे. ईरान का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर प्रदर्शन को सफल नहीं होने देंगे.

सीमा पार से भेजे गए हथियार

ईरान का कहना है कि हथियार भेजकर सरकार को अव्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है. खुफिया एजेंसी का कहना है कि ये सभी हथियार पश्चिमी देशों से भेजे गए हैं, जिसमें 100 ऐसे बंदूक मिले हैं, जो प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा था. खुफिया एजेंसी का कहना है कि हम उन लोगों को तलाश कर रहे हैं, जो तस्करी के जरिए इन हथियारों को ईरान में पहुंचा रहा है.

7 एजेंट को गिरफ्तार किया

बता दें कि ईरान ने 7 एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जिसमें से पांच संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित राजशाहीवादी समूहों के संपर्क में थे और 2 अन्य यूरोप में स्थित विरोधी समूहों से जुड़े हुए थे. फिलहाल, सभी से पूछताछ की जा रही है.

अधिकारों के आड़ में दुश्‍मनों की साजिश

ईरान की सरकार राजशाहीवादी नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है.खामेनेई के एक सलाहकार जनरल हुसैन अशतरी के मुताबिक ईरान के खिलाफ बड़ी साजिश हो रही है, जिसे समझने की जरूरत है. अशतरी ने आगे कहा कि अधिकारों जैसे नारों की आड़ में छिपी दुश्मन की साजिशों के बारे में समझने की जरूरत है. सभी लोग राष्ट्रीय एकता और सामाजिक विभाजन से बचिए. यही समय की मांग है.

ईरान में क्यों हो रहे हैं विरोध-प्रदर्शन?

दरअसल, ईरान में जल संकट और लगातार बढ़ रही महंगाई को लेकर व्यापारियों ने सबसे पहले विरोध प्रदर्शन शुरू किया. इसके बाद धीरे-धीरे छात्र और महिलाएं भी इस प्रदर्शन में शामिल हो गई. ईरान सरकार का कहना है कि शुरू में मुद्दे आधारित प्रदर्शन शुरू हुए थे, लेकिन अब यह आंदोलन बन चुका है. ऐसे में ईरान को डर है कि आंदोलन के माध्‍यम से उनकी सरकार न गिरा दी जाए. बता दें कि इससे पहले साल 1953 में सीआईए ने इसी तरह ईरान में तख्तापलट कराया था.

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