Donald Trump visit Greenland: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीते कुछ हफ्तों से लगातार ग्रीनलैंड का राग अलाप रहे हैं, वो ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कंट्रोल चाहते है. इसी बीच उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल ट्रुथ सोशल पर एक AI जेनेरेटिड तस्वीर शेयर की है, जिसमें वो मार्को रूबियों और जेडी वेंस के साथ के साथ ग्रीनलैंड में अमेरिकी झंडा लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं.
वहीं, इस तस्वीर में एक बोर्ड भी दिखाई दे रहा है, जिसपर लिखा है- ग्रीनलैंड अमेरिकी क्षेत्र स्थापना 2026. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार दावा कर रहे हैं कि अमेरिका का इस क्षेत्र पर कंट्रोल होना चाहिए. वहीं, हाल ही में उन्होंने कहा है कि सुरक्षा कारणों से अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है.
डेनमार्क को लेकर उठाए सवाल
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमें यह चाहिए ही. यह काम होना ही चाहिए. वो (डेनमार्क) इसकी रक्षा नहीं कर सकते. डेनमार्क के लोग बहुत अच्छे हैं और वहां के नेता भी अच्छे हैं, लेकिन वो वहां जाते तक नहीं हैं. साथ ही उन्होंने सवाल किया कि डेनमार्क के पास वहां मालिकाना हक क्यों है? कोई लिखित दस्तावेज नहीं हैं, बस इतना है कि सैकड़ों साल पहले वहां एक नाव उतरी थी, लेकिन हमारी नावें भी वहां उतरी थीं.
ग्रीनलैंड के लिए ताकत का करेंगे इस्तेमाल?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड पर पूरा और पूरी तरह नियंत्रण चाहिए. ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है. वहीं, ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए ताकतों का प्रयोग करने को लेकर किए गए सवाल पर उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि इस पर कोई टिप्पणी नहीं.
ट्रंप फैसले का विरोध करने वाले देशों पर अमेरिका ने लगाया टैरिफ
हालांकि ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कंट्रोल की योजना का कई देश जमकर विरोध कर रहे है, जो उन्हें रास नहीं आ रहा है. ऐसे में ट्रंप ने उनकी योजना का विरोध कर रहे 8 देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि 1 फरवरी से ब्रिटेन से अमेरिका भेजे जाने वाले हर तरह के सामान पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, जिसे 1 जून से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा. यह तब तक लागू रहेगा, जब तक वॉशिंगटन और डेनमार्क के बीच ग्रीनलैंड को खरीदने को लेकर कोई समझौता नहीं हो जाता.
ट्रंप के मुताबिक, यही नियम डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड और फिनलैंड पर भी लागू होगा. उन्होंने कहा, अब वक्त आ गया है कि डेनमार्क बदले में कुछ दे, और जोड़ा, चीन और रूस ग्रीनलैंड चाहते हैं, और डेनमार्क इसके बारे में कुछ भी नहीं कर सकता.
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