कृषि श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-AL) दिसंबर में सालाना आधार पर 0.04% रहा, जबकि ग्रामीण श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-RL) 0.11% दर्ज किया गया. यह जानकारी बुधवार को श्रम और रोजगार मंत्रालय ने दी. मंत्रालय के अनुसार, इस अवधि में खाद्य महंगाई कृषि श्रमिकों के लिए -1.8% और ग्रामीण श्रमिकों के लिए -1.73% रही. इसकी वजह उत्पादन बढ़ने के कारण खाद्य उत्पादों की कीमतों का कम होना है.
महंगाई में गिरावट से कमजोर वर्गों को राहत
हाल के महीनों में महंगाई दर में आई गिरावट उन कमजोर वर्गों के लिए राहत की बात है जो बढ़ती कीमतों से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. इससे उनके पास अधिक धन उपलब्ध होता है, जिससे वे ज्यादा सामान खरीद सकते हैं और उनका जीवन स्तर बेहतर होता है. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन श्रम ब्यूरो ने इस वर्ष जून से कृषि श्रमिकों और ग्रामीण श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का आधार वर्ष 2019=100 निर्धारित किया है. ये सूचकांक 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 787 गांवों से एकत्रित आंकड़ों पर आधारित हैं.
नई CPI सीरीज और पद्धतिगत बदलाव
नई CPI-AL और CPI-RL सीरीज (आधार वर्ष: 2019=100) को पुरानी 1986-87=100 सीरीज के स्थान पर लागू किया गया है. इस संशोधित सीरीज में दायरा और कवरेज बढ़ाया गया है, ताकि सूचकांक अधिक सटीक और भरोसेमंद बन सकें, साथ ही इसमें कई पद्धतिगत बदलाव भी किए गए हैं. इसके अलावा, दिसंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 1.33% रही, जबकि नवंबर में यह 0.71% थी.
थोक महंगाई और आरबीआई का अनुमान
वहीं, थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर दिसंबर 2025 में 0.83% दर्ज की गई, जो नवंबर में -0.32% थी. इसमें बढ़ोतरी का प्रमुख कारण विनिर्मित वस्तुओं और खनिजों की कीमतों में इजाफा बताया गया है. आरबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में खुदरा महंगाई दर करीब 2% के आसपास रह सकती है, जिसका कारण जीएसटी में कटौती और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी को माना जा रहा है.
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