‘कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा US!’, अब हैती को ट्रंप ने दी खुली चेतावनी, क्यों भडके अमेरिकी राष्ट्रपति?

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Washington: हैती के मौजूदा सरकार की संरचना में बदलाव होने के संकेत मिल रहे हैं. ऐसे में ट्रंप ने अब हैती को खुली चेतावनी दी है, जिससे एक बार फिर माहौल और सख़्त हो गया है. वॉशिंगटन ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर सत्ता के भीतर बैठे लोग देश को और अस्थिर करने की कोशिश करते हैं तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा. अमेरिका ने हैती की ट्रांजिशनल प्रेसिडेंशियल काउंसिल को आगाह किया है कि वह मौजूदा सरकार की संरचना में किसी भी तरह का बदलाव न करे.

देश की सुरक्षा और स्थिरता के खिलाफ

हैती में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि गैर-निर्वाचित परिषद अगर अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में सरकार को बदलने की कोशिश करती है तो इसे देश की सुरक्षा और स्थिरता के खिलाफ माना जाएगा. ऐसा कदम स्वीकार्य नहीं होगा. अमेरिकी दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग ऐसी पहलों का समर्थन करेंगे जो गिरोहों के हितों को आगे बढ़ाती हैं, वे न सिर्फ हैती बल्कि पूरे क्षेत्र और अमेरिका के हितों के विरुद्ध काम करेंगे.

इन मतभेदों की वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं

ऐसे मामलों में अमेरिका उचित कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब ट्रांजिशनल काउंसिल के कुछ सदस्यों और मौजूदा प्रधानमंत्री एलिक्स डिडियर फिल्स-एमी के बीच मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं. हालांकि इन मतभेदों की वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई है. अमेरिकी विदेश विभाग के वेस्टर्न हेमिस्फेयर ब्यूरो ने भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि हैती की पुरानी अस्थिरता के पीछे भ्रष्ट राजनेताओं की भूमिका रही है,

सत्ता हथियाने की कोशिश

जो गिरोहों का इस्तेमाल अराजकता फैलाने के लिए करते हैं और फिर उसी अराजकता को काबू करने के नाम पर सत्ता हथियाने की कोशिश करते हैं. विभाग ने कहा कि सच्ची स्थिरता केवल मतदाताओं के समर्थन से आएगी न कि हिंसा और डर के दम पर. बयान में यहां तक कहा गया कि जो परिषद सदस्य इस रास्ते पर चल रहे हैं वे देशभक्त नहीं बल्कि गिरोहों के साथ साठगांठ करने वाले लोग हैं.

चुनावी प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने की अपील

अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र दोनों ने हैती के नेताओं से मतभेद भुलाकर संस्थागत निरंतरता बनाए रखने और चुनावी प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की है. लेकिन मौजूदा हालात में सवाल यही है कि क्या हैती राजनीतिक खींचतान से बाहर निकल पाएगा या फिर अस्थिरता का यह दौर और गहराएगा?

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