जापान में शुरू होगा यूपीआई ट्रायल, भारतीय पर्यटक कर सकेंगे डिजिटल पेमेंट

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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भारत का क्यूआर कोड आधारित डिजिटल भुगतान सिस्टम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) अब तेजी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, जापान उन देशों में शामिल है जहां भारतीय पर्यटकों के लिए यूपीआई शुरू करने की तैयारी चल रही है. निक्केई एशिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि जापान की आईटी सर्विस कंपनी एनटीटी डेटा और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) मिलकर वित्त वर्ष 2026 में जापान में यूपीआई का ट्रायल शुरू करेंगी. इस पहल के तहत भारतीय पर्यटक जापान में यूपीआई के जरिए भुगतान कर सकेंगे और राशि सीधे उनके भारतीय बैंक खातों से डेबिट होगी.

जापान में यूपीआई ट्रायल की तैयारी

रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों कंपनियां जापान और भारत के भुगतान सिस्टम को आपस में जोड़ने के तरीकों पर काम कर रही हैं. यह कदम जापान आने वाले भारतीय पर्यटकों की तेजी से बढ़ती संख्या को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है. साल 2025 में करीब 3.15 लाख भारतीय पर्यटक जापान पहुंचे, जो पिछले साल के मुकाबले 35 प्रतिशत ज्यादा हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, मैकिन्से का अनुमान है कि भारत से विदेश यात्रा करने वाले लोगों की संख्या 2022 में 1.3 करोड़ से बढ़कर 2040 तक करीब 9 करोड़ तक पहुंच सकती है. इसके पीछे मध्यम वर्ग की बढ़ती आय और विदेश घूमने की बढ़ती रुचि को प्रमुख वजह माना जा रहा है.

यूपीआई की ताकत और बढ़ता उपयोग

वर्ष 2016 में शुरू हुआ यूपीआई सरकार की एक पहल है, जो आज आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. यूपीआई के जरिए एक ही क्यूआर कोड से अलग-अलग भुगतान ऐप्स का इस्तेमाल कर लेनदेन किया जा सकता है. वित्त वर्ष 2024 में यूपीआई ट्रांजेक्शन में 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह आंकड़ा 185.8 अरब तक पहुंच गया. वहीं जून 2025 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने यूपीआई को दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम भुगतान सिस्टम करार दिया. एनपीसीआई और भारत सरकार अब तक आठ देशों में यूपीआई को शुरू कर चुकी है, जिनमें भूटान, सिंगापुर, फ्रांस, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.

भविष्य की भुगतान व्यवस्था की दिशा

इसके अलावा पेरू और नामीबिया जैसे देशों को भी इसी तरह की भुगतान व्यवस्था बनाने में मदद की जा रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में यूपीआई की तेजी से लोकप्रियता का कारण इसका एक साझा प्लेटफॉर्म होना है, जिस पर बैंक और फिनटेक कंपनियां अपने भुगतान ऐप विकसित करती हैं.साल 2024 में भारत में दुकानों पर होने वाले 58 प्रतिशत भुगतान यूपीआई से हुए और अनुमान है कि 2030 तक यह आंकड़ा 76 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा. वहीं नकद लेनदेन 15 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत रह सकता है. एनटीटी डेटा, जो जापान में व्यापारियों को यूपीआई से जोड़ने की तैयारी में है, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में पहले से ही भुगतान सेवाएं देता है. कंपनी की सेवाओं का इस्तेमाल भारत की करीब 60 लाख दुकानें, जिनमें ऑनलाइन कारोबार भी शामिल हैं, कर रही हैं.

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