केंद्र सरकार ने अब तक देश में 10 सेमीकंडक्टर प्लांट्स को मंजूरी दी है, जिनमें से चार प्लांट्स में उत्पादन पायलट चरण में पहुंच चुका है. यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बुधवार को दी. लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं में करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है और चार इकाइयों में उत्पादन शुरू हो चुका है.
फैब और पैकेजिंग यूनिट्स का विस्तार
आधिकारिक बयान में आगे कहा गया कि मंजूर प्रोजेक्ट्स में दो फैब और आठ पैकेजिंग यूनिट्स शामिल हैं, जिनमें सीएमओएस (सिलिकॉन) फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, उन्नत पैकेजिंग और मेमोरी पैकेजिंग यूनिट्स शामिल हैं. स्टार्टअप्स के माध्यम से 24 चिप-डिजाइन परियोजनाओं को समर्थन दिया गया है, जिनमें से 16 ने टेपआउट पूरा कर लिया है और 13 को वेंचर कैपिटल फंडिंग प्राप्त हुई है.
EDA टूल्स से इंजीनियरों को लाभ
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि 350 विश्वविद्यालयों को इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) टूल्स तक पहुंच प्रदान की गई है, जिनका उपयोग 65,000 इंजीनियर कर रहे हैं. सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने के मकसद से केंद्र सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की है. इस कार्यक्रम के तहत डिजाइन, निर्माण, असेंबली, परीक्षण, पैकेजिंग, मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग और फैब्रिकेशन जैसी सभी प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है.
आईटी निर्यात में तेज बढ़ोतरी
सरकार ने नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि बीते पांच वर्षों में आईटी सेक्टर के प्रदर्शन में सुधार हुआ है और 2020-21 से 2024-25 के दौरान आईटी निर्यात 152 अरब डॉलर से बढ़कर 224.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. मंत्रालय ने बताया कि इसी अवधि में कुल आय 196 अरब डॉलर से बढ़कर 283 अरब डॉलर हो गई है.
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से उम्मीदें
विश्लेषकों का अनुमान है कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत से हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर क्षमताओं के एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा और देश का टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम काफी मजबूत होगा, जिससे भारत अगली पीढ़ी के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में अग्रणी देश के रूप में स्थापित होगा.
आरईपीएम योजना से रणनीतिक मजबूती
7,280 करोड़ रुपये की सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) योजना के जरिए सरकार रणनीतिक सामग्रियों की सुरक्षित उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहती है, जिससे भारत की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी व्यापक महत्वाकांक्षाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
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