Khamenei Death Aftermath: खामेनेई की मौत के बाद भारत में झुका ईरानी दूतावास का झंडा, दुनिया से हमले की निंदा करने की अपील

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Khamenei Death Aftermath: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन के बाद पूरे देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है. इस दौरान पवित्र इमाम रजा दरगाह पर काला झंडा फहराया गया, जो गहरे शोक का प्रतीक माना जाता है. वहीं भारत स्थित ईरानी दूतावास में भी ईरान का राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका दिया गया है. इसके साथ ही ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले की कड़ी निंदा की जाए और इस घटना के खिलाफ वैश्विक स्तर पर आवाज उठाई जाए.

ईरानी दूतावास की कड़ी प्रतिक्रिया

ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का दूतावास, अमेरिका और इजरायल की सरकार के कथित क्रूर हमलों के बाद अयातुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई की शहादत पर गहरा दुख और शोक व्यक्त करता है. दूतावास ने दुनिया के तमाम देशों से अपील की है कि वे इस घटना की कड़ी निंदा करें और अंतरराष्ट्रीय कानून की अनदेखी के खिलाफ आवाज उठाएं.

हमले के गंभीर परिणाम की चेतावनी

ईरानी दूतावास ने आगे कहा कि इस माफ न किए जा सकने वाले अपराध के गंभीर परिणाम होंगे और इसके लिए जिम्मेदार पक्षों को जवाब देना होगा. बयान में कहा गया कि ईरान ताकत, साहस और दृढ़ संकल्प के साथ अपने रास्ते पर आगे बढ़ता रहेगा और देश के मामलों में किसी भी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी. साथ ही यह भी कहा गया कि शहीदों का खून ईरानी जनता के अपने सम्मान, स्वतंत्रता और आदर्शों की रक्षा के संकल्प को और मजबूत करेगा.

अमेरिका और इजरायल को बदले की चेतावनी

खामेनेई की मौत के बाद ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका और इजरायल को जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है. सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी और खामेनेई के सलाहकार अली लारीजानी ने कहा कि अमेरिकियों ने ईरानी जनता के दिल पर चोट पहुंचाई है और इसका जवाब दिया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की सेना की प्रतिक्रिया और अधिक मजबूत होगी और विरोधियों को यह समझ लेना चाहिए कि हमला करके बच निकलना संभव नहीं है.

अस्थायी नेतृत्व और आगे की रणनीति

उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति और न्यायपालिका प्रमुख को शामिल करते हुए जल्द ही एक अस्थायी नेतृत्व व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि देश के प्रशासनिक कामकाज में कोई बाधा न आए. ईरान ने क्षेत्रीय देशों के नेताओं को यह भरोसा भी दिलाया है कि उसका उनसे युद्ध करने का इरादा नहीं है, लेकिन मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने उसके निशाने पर बने रहेंगे. लारीजानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका ईरान को डराकर या दबाव बनाकर झुका नहीं सकता और देश अपनी रणनीति पर मजबूती से कायम रहेगा.

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