आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में फहराया गया ‘लाल झंडा’, क्या है इसका मतलब?

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Red Flag at Jamkaran Mosque: ईरान के पवित्र शहर कोम की जामकरन मस्जिद पर लाल झंडा फहराया गया है, जिसे शिया परंपरा में प्रतिशोध का झंडा माना जाता है. बता दें कि यह झंडा तब फहराया जाता है, जब देश किसी बड़े अन्याय का बदला लेने या युद्ध की तैयारी का संकेत देता है. ऐसे में इस वक्‍त इस झंडे का फहराया जाना किसी बड़े जवाबी कार्रवाई का संकेत माना जा रहा है. ईरान में यह कदम सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद उठाया गया है.

दरअसल, शनिवार को तेरहान में एक हमले के दौरान आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हुई, जो इजरायल और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ईरान के लिए एक नए युग की शुरुआत बताया, जहां जनता को अपनी सरकार बदलने का मौका मिला है.

क्यों लगाते हैं लाल झंडा?

शिया मुस्लिम में लाल रंग अन्यायपूर्ण तरीके से बहाए गए खून का प्रतीक है, जो इस बात को याद दिलाता है कि किसी निर्दोष या बड़े नेता की हत्या हुई है, जिसका बदला लेना अभी बाकी है. यह परंपरा इमाम हुसैन से जुड़ी है. प्राचीन अरब में जब किसी कबीले के मुखिया की हत्या होती थी और उसका बदला नहीं लिया जाता था, तो उसके घर या कब्रिस्तान पर लाल झंडा लगा दिया जाता था और जब बदला पूरा हो जाता था, तब इसे हटाकर काला या हरा झंडा लगाया जाता था. जामकरन मस्जिद पर इसे लगाने का मतलब है कि पूरा देश शोक में है और वह अपने दुश्मन से कड़े प्रतिशोध की मांग कर रहा है.

जामकरन मस्जिद ही क्यों?

दरअसल, ईरान में जामकरन मस्जिद को काफी पवित्र माना जाता है, क्‍योंकि शिया मान्‍यताओं के अनुसार, इसका संबंध इमाम महदी (12वें इमाम) से है. यहां झंडा फहराने का मतलब है कि यह लड़ाई अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि धार्मिक और पवित्र बन चुकी है.

ईरान में तीन सदस्यीय परिषद का गठन

इसके अलावा, ईरान में इस संकट के बीच शासन चलाने के लिए एक तीन सदस्यीय परिषद का गठन किया गया है. इसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और मुख्य न्यायाधीश मोहसेनी एजेई के साथ 66 वर्षीय मौलवी अलीरेज़ा अराफी को भी शामिल किया गया है. यह परिषद तब तक देश का कार्यभार संभालेगी जब तक असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नए सुप्रीम लीडर का चुनाव नहीं कर लेती. खामेनेई की मौत की घटना ने पूरे मिडिल ईस्ट में भारी तनाव पैदा कर दिया है और दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं.

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