‘सुश्रुत संहिता’ का ज्ञान वो भी फ्रेंच में…; मैक्रों हो गए मंत्रमुग्ध; मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सुनाया किस्सा

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Bharat Express Mega Conclave 2026: ‘विकसित भारत 2047: नए भारत की बात’ थीम पर दिल्ली में आयोजित भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क के तीसरे स्थापना दिवस के मेगा कॉन्क्लेव में प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक के अद्भुत संगम की एक बेहद रोचक और गौरवशाली कहानी सामने आई.

कॉन्क्लेव के मंच पर भारत एक्सप्रेस के सीएमडी और एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय के साथ खास बातचीत में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि कैसे भारत सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर अपने प्राचीन शास्त्रों को दुनिया भर की भाषाओं में पहुंचा रही है.

‘कंप्यूटर-रीडेबल’ बन रही हैं पांडुलिपियां

चर्चा के दौरान मंत्री शेखावत ने एक अहम जानकारी देते हुए बताया कि पुरानी पांडुलिपियों को सिर्फ फोटोकॉपी या स्कैन करके रिपॉजिटरी में स्टोर नहीं किया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप, इन दस्तावेजों को ‘कंप्यूटर-रीडेबल’ (मशीन द्वारा पढ़े जा सकने वाले) फॉर्मेट में बदला जा रहा है.

इसके लिए सरकार अपना खुद का ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल’ (LLM) विकसित कर रही है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जो भाषाएं आज लुप्त हो चुकी हैं या जिन्हें पढ़ना मुश्किल है, उन्हें AI के जरिए ट्रांसलिटरेशन (लिप्यंतरण) कर दुनिया की किसी भी भाषा में आसानी से पढ़ा और समझा जा सकेगा.

हैरान रह गए फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों

भारत की इस तकनीकी ताकत का लोहा दुनिया कैसे मान रही है, इसका एक दिलचस्प किस्सा मंत्री शेखावत ने कॉन्क्लेव में साझा किया. उन्होंने भारत में आयोजित दुनिया की सबसे बड़ी ग्लोबल AI समिट का जिक्र किया, जहां ‘इंडिया पवेलियन’ में इस तकनीक का प्रदर्शन किया गया था. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जब वहां पहुंचे, तो उन्होंने खुद ‘सुश्रुत संहिता’ की एक डिजिटल कॉपी को एन्हांस किया. हैरानी की बात तब हुई जब उनके सामने प्राचीन भारतीय शल्य चिकित्सक ‘सुश्रुत’ का AI अवतार प्रकट हुआ और उसने सुश्रुत संहिता का ज्ञान सीधे फ्रेंच भाषा में बोलकर सुनाया. फ्रांस के राष्ट्रपति भारत की इस उपलब्धि को देखकर बेहद प्रभावित हुए.

भारत एक्सप्रेस मेगा कॉन्क्लेव के इस विशेष सत्र ने यह साबित कर दिया कि भारत अब तकनीक के मामले में दुनिया का पिछलग्गू नहीं, बल्कि पथप्रदर्शक बन रहा है. AI और प्राचीन ज्ञान का यह संगम इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि विकसित भारत का संकल्प आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक गौरव के दोनों पहियों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसकी गूंज इस मेगा कॉन्क्लेव के जरिए पूरी दुनिया तक पहुंची है.

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