ईरानी मिसाइलों में शामिल रूस की तकनीकी मदद, मिडिल ईस्ट की जंग के बीच बड़ा खुलासा

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Russia Iran Military Support : पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच एक नई जानकारी सामने आई है. ऐसे में जांच में पता चला है कि ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों के निर्माण में रूस की तकनीकी मदद शामिल हो सकती है. इसके साथ ही एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा करते हुए कहा कि इस बीच बढ़ते संघर्ष के कारण भारत ने भी अपने तेल आयात के स्रोतों में बदलाव किया है और रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है.

प्राप्‍त जानकारी के मुताबिक, ईरान की तरफ से दागी गई मिसाइलों के मलबे की जांच में पता चला है कि इन मिसाइलों के निर्माण में रूसी विशेषज्ञों की मदद ली गई हो सकती है. क्‍योंकि जांच के बाद संकेत मिले हैं कि इन मिसाइलों की तकनीक और निर्माण प्रक्रिया में रूस और सोवियत दौर के विशेषज्ञों का योगदान रहा है. जानकारी के मुताबिक, ईरान ने इन मिसाइलों को पूरी तरह अपने दम पर तैयार नहीं किया. अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद रूस खुलकर ईरान के समर्थन में खड़ा नजर आ रहा है.

ईरान में निशाना बनाने के लिए अब कुछ नही

ऐसे में एक बार फिर ट्रंप ने दावा किया कि काफी लंबे समय से चल रहा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है. उन्होंने एक फोन बातचीत में कहा कि यह युद्ध तब खत्म हो जाएगा जब वह चाहेंगे. उनका कहना है कि युद्ध के दौरान अब ईरान में निशाना बनाने के लिए लगभग कुछ भी बाकी नहीं बचा है. ऐसे में ट्रंप ने कहा कि हालात का देखते हुए वह जब चाहें तब इस युद्ध को समाप्त कर सकते हैं. हालांकि ट्रंप के इस बयान के बावजूद अभी तक क्षेत्र में हमले और जवाबी कार्रवाई जारी है.

कार्रवाई तब तक चलेगी जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते

इसी बीच इजरायल का कहना है कि अमेरिका के साथ मिलकर चलाया जा रहा सैन्य अभियान जारी रहेगा. उन्‍होंने स्‍पष्‍ट करते हुए कहा कि यह कार्रवाई तब तक चलेगी जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते और अभियान का अंतिम नतीजा तय नहीं हो जाता. इस दौरान इस अभियान की कोई समय सीमा तय नहीं की गई है और जरूरत पड़ने पर इसे लंबे समय तक जारी रखा जाएगा.

भारत ने बढ़ाई रूसी तेल की खरीद

बता दें कि पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष का असर ऊर्जा बाजार पर भी दिख रहा है. इसके साथ ही भारत ने मार्च महीने में रूस से कच्चे तेल की खरीद में लगभग पचास प्रतिशत की बढ़ोतरी की है. ऐसे में जहाज निगरानी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार इस महीने भारत ने करीब पंद्रह लाख बैरल रूसी तेल खरीदा है. प्राप्‍त जानकारी के अनुसार भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयात करने वाला देश है और अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग अट्ठासी प्रतिशत विदेशों से खरीदता है.

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