Papmochani Ekadashi: सनातन धर्म में नारायण को समर्पित एकादशी तिथि का खासा धार्मिक महत्व है. होलिका दहन और चैत्र नवरात्रि के बीच आने वाली कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहते हैं, जो रविवार को पड़ रही है. यह व्रत भगवान नारायण को समर्पित है और पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है.
Papmochani Ekadashi पर लग रहा द्विपुष्कर योग
खास बात यह है कि एकादशी पर द्विपुष्कर योग लग रहा है, जो धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. इस योग में पूजा, दान और व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है. दृक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में पापमोचनी एकादशी है, जो सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर शुरू होकर 15 मार्च की सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार, 15 मार्च को पूरे दिन एकादशी तिथि का मान होगा.
जानिए शुभ मुहूर्त
रविवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 31 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 29 मिनट पर होगा. नक्षत्र श्रवण रहेगा, जो 16 मार्च की सुबह 5 बजकर 56 मिनट तक फिर धनिष्ठा लग जाएगा. योग परिघ सुबह 10 बजकर 25 मिनट तक और करण बालव रहेगा. रविवार को शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 55 मिनट से 5 बजकर 43 मिनट तक अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 51 मिनट तक रहेगा.
राहुकाल का समय
वहीं,अमृत काल शाम 7 बजकर 3 मिनट से 8 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. रविवार को अति शुभ द्विपुष्कर योग भी लग रहा है. 15 मार्च को राहुकाल शाम 5 बजे से 6 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. यमगंड दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से 2 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 30 मिनट से 5 बजे तक और दुर्मुहूर्त शाम 4 बजकर 54 मिनट से 5 बजकर 41 मिनट तक रहेगा. इन समय में शुभ या नया कार्य वर्जित होता है.
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