Fuel Price Hike: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है और इसका सबसे ताजा उदाहरण दक्षिण-पूर्व एशियाई देश Cambodia में देखने को मिला है. ईंधन संकट के चलते यहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है, जिससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है. वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, जैसे ही मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा, ईंधन की कीमतों ने तेजी से छलांग लगानी शुरू कर दी.
डीजल की कीमत दोगुनी से ज्यादा
सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, कंबोडिया में डीजल की कीमत अब 8,100 रीएल (लगभग 2.03 डॉलर) प्रति लीटर पहुंच गई है. यह फरवरी के अंत में 3,850 रीएल (0.96 डॉलर) थी, यानी कीमतों में करीब 110 फीसदी की भारी बढ़ोतरी हुई है. इसी तरह, रेगुलर गैसोलीन की कीमत बढ़कर 5,500 रीएल (1.37 डॉलर) प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 3,850 रीएल थी, यानी करीब 42.8 फीसदी की वृद्धि.
एलपीजी भी महंगी
सिर्फ पेट्रोल और डीजल ही नहीं, बल्कि लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की कीमतों में भी तेज उछाल आया है. एलपीजी अब 3,900 रीएल (0.97 डॉलर) प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 2,000 रीएल (0.50 डॉलर) थी. यानी इसमें करीब 95 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ईंधन के इन बढ़ते दामों का असर घरेलू खर्च से लेकर ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्री तक हर क्षेत्र पर पड़ रहा है.
पूरी तरह आयात पर निर्भर: संकट और गहराया
कंबोडिया की स्थिति इसलिए और गंभीर हो गई है, क्योंकि यह देश पूरी तरह से आयातित पेट्रोलियम और डीजल पर निर्भर है. हालांकि समुद्र के नीचे तेल भंडार मौजूद हैं, लेकिन उनका अभी तक उपयोग नहीं किया गया है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में हलचल का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.
सरकार का कदम: टैक्स में कटौती
बढ़ती कीमतों के दबाव को कम करने के लिए सरकार ने 20 मार्च को ईंधन उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी और टैक्स में कटौती की घोषणा की. इसके बाद 28 मार्च को सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों, प्लग-इन हाइब्रिड कारों, इलेक्ट्रिक स्टोव और सोलर उपकरणों पर भी आयात शुल्क कम करने का फैसला लिया. सरकार का उद्देश्य वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देकर ईंधन पर निर्भरता कम करना है.
हवाई किराए भी बढ़े
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर एविएशन सेक्टर पर भी साफ दिखाई दे रहा है. कंबोडिया में 31 मार्च तक 36 में से 18 एयरलाइंस ने अपने टिकट के दाम बढ़ा दिए. State Secretariat of Civil Aviation के प्रवक्ता सिन चांसेरी वुथा के मुताबिक, एयरलाइंस ने फ्लाइट की दूरी के हिसाब से फ्यूल सरचार्ज जोड़ दिया है.
घरेलू एयरलाइनों ने अपने किराए में औसतन करीब 21 डॉलर की बढ़ोतरी की है, जबकि विदेशी एयरलाइनों ने लगभग 28 डॉलर तक किराया बढ़ाया है. इससे यात्रियों के लिए यात्रा करना और महंगा हो गया है.
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