भूटान में सात साल बाद भारत का प्रोजेक्ट अब दोबारा शुरू, देश को ऊर्जा स्रोत के क्षेत्र में मिली बड़ी सफलता

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New Delhi: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बने अनिश्चित माहौल के बीच भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के क्षेत्र में बड़ी राहत मिलने वाली है. भूटान में भारत की मदद से बन रही पुनात्सांगछू-I जलविद्युत परियोजना अब दोबारा शुरू हो गया है. करीब सात साल तक तकनीकी समस्याओं की वजह से यह प्रोजेक्ट रुका हुआ था. इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.

निर्माण दोबारा शुरू करना सुरक्षित है या नहीं?

बड़े उत्साह के साथ इस प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी, लेकिन 2013 में बांध के पास पहाड़ी धंसने की घटना ने पूरे काम को झटका दे दिया. यह समस्या इतनी गंभीर थी कि विशेषज्ञों को यह तय करने में ही कई साल लग गए कि निर्माण दोबारा शुरू करना सुरक्षित है या नहीं? देरी का सीधा असर लागत पर पड़ा और जो प्रोजेक्ट शुरुआती दौर में कुछ हजार करोड़ रुपये में पूरा होने वाला था, उसकी लागत अब बढ़कर 10000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है.

इस परियोजना को जारी रखने का फैसला

इसके बावजूद भारत और भूटान दोनों ने इस परियोजना को जारी रखने का फैसला किया, क्योंकि इसका रणनीतिक महत्व बहुत बड़ा है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा अभी भी आयातित तेल और गैस से पूरा करता है. ऐसे में जब वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता है और तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं, तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. ऐसी स्थिति में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भारत के लिए एक तरह का एनर्जी इंश्योरेंस बन जाते हैं.

 पर्यावरण के लिहाज से भी अहम है यह परियोजना

भूटान से मिलने वाली बिजली न सिर्फ सस्ती होती है, बल्कि इसकी कीमत स्थिर रहती है, जिससे पावर सेक्टर को झटके कम लगते हैं. यह परियोजना सिर्फ आर्थिक ही नहीं, पर्यावरण के लिहाज से भी अहम है. हाइड्रोपावर एक क्लीन एनर्जी सोर्स है, जिससे कार्बन उत्सर्जन नहीं होता. भारत ने अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने और रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने के जो लक्ष्य तय किए हैं, उन्हें हासिल करने में इस तरह के प्रोजेक्ट बड़ी भूमिका निभाते हैं.

भविष्य की रणनीतिक तैयारी

यह प्रोजेक्ट सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ा जियोपॉलिटिकल एंगल भी है. ऐसे समय में जब दुनिया ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नए समीकरण बना रही है, भारत हिमालयी क्षेत्र में अपने एनर्जी बैंक को मजबूत कर रहा है. यही वजह है कि पुनात्सांगछू जलविद्युत परियोजना को सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है.

निर्माण में कोई बड़ी बाधा नहीं

इसी श्रृंखला का दूसरा प्रोजेक्ट पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना पहले ही पूरा होकर चालू हो चुका है. इसकी वजह यह रही कि वहां भौगोलिक स्थितियां ज्यादा स्थिर थीं और निर्माण में कोई बड़ी बाधा नहीं आई. 2025 से यह प्रोजेक्ट भारत को बिजली सप्लाई कर रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत हुआ है. हालांकि असली गेम-चेंजर पुनात्सांगछू-I को माना जा रहा है, क्योंकि इसकी क्षमता ज्यादा है और यह भारत के पावर ग्रिड को और मजबूत करेगा.

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