Asha Bhosle: 8 दशक का शानदार सफर, 12,000 से ज्यादा गाने, गिनीज रिकॉर्ड में दर्ज नाम—जानिए सुरों की मल्लिका की कहानी

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Asha Bhosle:भारतीय संगीत जगत ने आज एक ऐसी आवाज खो दी, जिसने दशकों तक देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के श्रोताओं के दिलों पर राज किया. सुरों की मल्लिका के नाम से मशहूर आशा भोसले का 12 अप्रैल को निधन हो गया. मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने 92 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. शुरुआती जानकारी के अनुसार, उनके निधन की वजह मल्टीपल ऑर्गन फेलियर बताई जा रही है. आशा भोसले के निधन की खबर सामने आते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई. संगीत प्रेमियों, फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है. उनकी आवाज ने न सिर्फ भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया, बल्कि पीढ़ियों को संगीत से जोड़े रखा.

संगीत का ऐसा सफर, जिसने इतिहास रच दिया

आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को एक प्रतिष्ठित मंगेशकर परिवार में हुआ था. बचपन से ही संगीत उनके जीवन का हिस्सा रहा. उन्होंने अपने लंबे और शानदार करियर में करीब 800 से अधिक फिल्मों के लिए 12,000 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए. उनकी इस अद्भुत उपलब्धि के लिए उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में संगीत इतिहास की सबसे ज्यादा गाने रिकॉर्ड करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता दी गई. यह उपलब्धि अपने आप में उनके असाधारण प्रतिभा और मेहनत का प्रमाण है.

पिता से मिली संगीत की शिक्षा, बचपन में ही संभाली जिम्मेदारी

आशा भोसले, महान गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं. उन्होंने अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर से शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीखी. कम उम्र में ही पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. ऐसे में उन्होंने बहुत छोटी उम्र में ही फिल्मों के लिए गाना शुरू कर दिया. साल 1948 में फिल्म ‘चुनरिया’ से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन सफलता उन्हें तुरंत नहीं मिली.

हर अंदाज में ढलने वाली आवाज

आशा भोसले की सबसे बड़ी खासियत उनकी versatility यानी बहुमुखी प्रतिभा थी. उन्होंने गजल, भजन, पॉप, कैबरे और वेस्टर्न स्टाइल के गानों में अपनी अलग पहचान बनाई. उनके गाए गाने जैसे “दम मारो दम”, “पिया तू अब तो आजा”, “दिल चीज क्या है”, “ये मेरा दिल” और “चुरा लिया है तुमने” आज भी सदाबहार हैं. उनकी आवाज में एक अलग ही जादू था, जो हर पीढ़ी को अपनी ओर खींचता था.

ओ.पी. नैयर के साथ मिला बड़ा मुकाम

साल 1957 में संगीतकार ओ.पी. नैयर के साथ फिल्मों ‘नया दौर’ और ‘तुमसा नहीं देखा’ में उन्हें बड़ा ब्रेक मिला. इसके बाद ‘हावड़ा ब्रिज’, ‘चलती का नाम गाड़ी’ और ‘लाजवंती’ जैसी फिल्मों के गानों ने उन्हें स्टार बना दिया. 1960 और 70 के दशक में वह ओ.पी. नैयर की पसंदीदा गायिका रहीं और दोनों ने मिलकर कई हिट गाने दिए.

प्लेबैक सिंगिंग की क्वीन बनीं आशा

1960 के दशक के अंत तक आशा भोसले अपनी बहन लता मंगेशकर के बाद दूसरी सबसे लोकप्रिय गायिका बन चुकी थीं. दोनों बहनों ने 1990 के दशक तक भारतीय संगीत पर राज किया और प्लेबैक सिंगिंग की क्वीन कहलायीं.

निजी जीवन और संगीत की साझेदारी

आशा भोसले ने 16 साल की उम्र में गणपतराव भोसले से शादी की, लेकिन बाद में उनका तलाक हो गया. इसके बाद उन्होंने 1980 में मशहूर संगीतकार आर.डी. बर्मन से शादी की. आर.डी. बर्मन और आशा भोसले की जोड़ी ने भारतीय संगीत को एक नया आयाम दिया. ‘हरे रामा हरे कृष्णा’, ‘जवानी दीवानी’ और ‘हम किसी से कम नहीं’ जैसी फिल्मों में उनके गाने आज भी सुपरहिट माने जाते हैं.

सम्मानों से सजी एक महान विरासत

आशा भोसले को उनके अद्वितीय योगदान के लिए कई बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया गया:

👉 दादासाहेब फाल्के पुरस्कार (2000)
👉 पद्म विभूषण (2008)
👉 7 फिल्मफेयर पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका)

ये सभी सम्मान उनके संगीत के प्रति समर्पण और उत्कृष्टता को दर्शाते हैं.

गायिका ही नहीं, सफल उद्यमी भी थीं आशा

संगीत के अलावा आशा भोसले एक सफल उद्यमी भी थीं. उन्हें कुकिंग का विशेष शौक था और उन्होंने ‘Asha’s’ नाम से अंतरराष्ट्रीय रेस्टोरेंट चेन शुरू की. इसकी शुरुआत 2002 में दुबई के WAFI City Mall से हुई और आज इसके आउटलेट कुवैत, बहरीन और यूके तक फैले हुए हैं. इसके अलावा वह कई रियलिटी शो में जज के रूप में भी नजर आ चुकी हैं और नई प्रतिभाओं को मंच देने में योगदान दिया है.

एक युग का अंत, लेकिन आवाज अमर रहेगी

आशा भोसले का निधन भारतीय संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. उनकी आवाज, उनकी शैली और उनके गाने आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बने रहेंगे. उन्होंने न केवल गानों को आवाज दी, बल्कि भावनाओं को स्वर दिया. उनका जाना एक युग का अंत है, लेकिन उनकी विरासत हमेशा जिंदा रहेगी.

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