प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत का फार्मा क्षेत्र अब “दुनिया की फार्मेसी” की पहचान से आगे बढ़कर नवाचार के केंद्र के रूप में उभर रहा है. उन्होंने कहा कि देश अब केवल सस्ती दवाओं का वैश्विक आपूर्तिकर्ता नहीं रहा, बल्कि शोध और नई तकनीकों के दम पर फार्मास्यूटिकल इनोवेशन में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है.
शोध आधारित विकास पर बढ़ा फोकस
पीएम मोदी ने देश में शोध-आधारित विकास पर बढ़ते जोर को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत अब वैल्यू चेन में ऊपर जा रहा है. उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए कहा कि फार्मा सेक्टर में अनुसंधान एवं विकास, बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और अगली पीढ़ी की चिकित्सा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा. “दुनिया की फार्मेसी से लेकर नवाचार के केंद्र तक, भारत का फार्मा क्षेत्र वैल्यू चेन में ऊपर जा रहा है.” उन्होंने आगे कहा, “वर्तमान सरकार के तहत आरएंडडी, बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और अत्याधुनिक उपचारों पर व्यापक ध्यान दिया जा रहा है.”
नड्डा के लेख को बताया अहम विश्लेषण
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से साझा की गई पोस्ट में जेपी नड्डा के लेख को देश के फार्मा क्षेत्र की दिशा को समझने के लिए “जरूर पढ़ा जाने वाला विश्लेषण” बताया गया. प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा. “केंद्रीय मंत्री नड्डा का यह लेख इस बात पर एक महत्वपूर्ण पुनरावलोकन है कि भारत इस क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नेतृत्व के लिए कैसे तैयार हो रहा है.”
नीतिगत समर्थन से बदली सेक्टर की दिशा
लेख में बताया गया है कि हाल के वर्षों में सरकार के नीतिगत समर्थन और निरंतर फोकस ने फार्मा सेक्टर की दिशा को बदल दिया है. इसमें कहा गया है कि भारत अब केवल जेनेरिक दवाओं के बड़े पैमाने पर उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि अब उन्नत शोध क्षमताओं और जटिल दवा विकास में भी निवेश कर रहा है.
इनोवेशन आधारित इकोसिस्टम पर जोर
लेख के अनुसार, सरकार ने अनुसंधान एवं विकास निवेश को प्रोत्साहित कर और एक ऐसा इकोसिस्टम बनाकर नवाचार-आधारित विकास को प्राथमिकता दी है, जो अत्याधुनिक उपचारों को समर्थन देता है.
बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स पर बढ़ता फोकस
लेख में बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स पर बढ़ते जोर का भी उल्लेख है. इन्हें वैश्विक फार्मा उद्योग के अगले चरण के विकास का प्रमुख चालक माना जा रहा है.
लेख में जेपी नड्डा ने कहा. “भारत, जिसे लंबे समय से जेनेरिक दवाओं में नेतृत्व के कारण ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता रहा है, अब पैमाने से नवाचार की ओर बढ़ने के लिए तैयार है.”
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