Fuel Price Update: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़े असर के बीच भारत से एक राहत भरी खबर सामने आई है. मार्च-अप्रैल के दौरान जहां दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं भारत में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है. इसके बावजूद भारत में कीमतों को नियंत्रित रखना यह दर्शाता है कि सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सक्रिय और संतुलित नीति अपनाई है.
पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में तेज उछाल
अगर पड़ोसी देश पाकिस्तान की बात करें तो वहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है. 28 फरवरी को जहां पेट्रोल का दाम 266.17 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर था, वहीं 16 अप्रैल तक यह बढ़कर 366.58 रुपए प्रति लीटर हो गया. इसी तरह डीजल का दाम 280.86 रुपए से बढ़कर 385.54 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है. इस अवधि में पेट्रोल की कीमत में 37.74 प्रतिशत और डीजल में 37.27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. यह तेजी वहां के आम लोगों पर सीधा आर्थिक दबाव डाल रही है और महंगाई को और बढ़ा रही है.
नेपाल में भी सबसे ज्यादा महंगा हुआ ईंधन
नेपाल में भी ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बीते एक महीने में चार बार कीमतों में इजाफा किया गया है, जिससे वहां पेट्रोल और डीजल दक्षिण एशिया में सबसे महंगे स्तर पर पहुंच गए हैं. पेट्रोल की कीमत 219 नेपाली रुपए प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल 207 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है. 28 फरवरी को पेट्रोल 154 रुपए और डीजल 156 रुपए प्रति लीटर था. इसका मतलब है कि पेट्रोल में 42.20 प्रतिशत और डीजल में 32.59 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. यह उछाल वहां की अर्थव्यवस्था और आम जनता दोनों के लिए चुनौती बन गया है.
भारत में कीमतें स्थिर, उपभोक्ताओं को राहत
इसके विपरीत भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपए प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है. यह स्थिरता ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी उथल-पुथल है. भारत में कीमतें न बढ़ने से आम लोगों को बड़ी राहत मिली है और महंगाई पर भी नियंत्रण बना हुआ है.
कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पिछले एक महीने में तेज उछाल आया है. कीमतें करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण मध्य पूर्व में जारी तनाव और सप्लाई रूट्स पर पड़ा असर है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में आई बाधा, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है. इससे पूरी दुनिया में ईंधन की लागत बढ़ गई है.
सरकार की रणनीति, खुद उठाया बोझ
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले ही स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बोझ आम जनता पर न डालने का फैसला लिया है. यही कारण है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं की गई. सरकार ने खुद इस दबाव को संभाला और उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की.
दुनिया भर में बढ़ीं कीमतें
सिर्फ पाकिस्तान और नेपाल ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में ईंधन की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है. दक्षिण-पूर्व एशिया में कीमतें 30 से 50% तक बढ़ी हैं, उत्तरी अमेरिका में लगभग 30%, यूरोप में करीब 20% और अफ्रीका में 50% तक की वृद्धि दर्ज की गई है. यह वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता को दर्शाता है.
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