State Capex FY27: राज्यों का इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस जारी, पूंजीगत खर्च 8-10% बढ़ने का अनुमान

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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State Capex FY27: देश के राज्यों की वित्तीय रणनीति में आने वाले समय में भी इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता मिलती रहेगी. एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में राज्य सरकारें पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) को जारी रखेंगी, हालांकि इसकी वृद्धि दर कुछ धीमी रह सकती है.

रेटिंग एजेंसी CareEdge Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, FY27 में राज्यों का कैपेक्स ग्रोथ लगभग 8 से 10 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है. यह संकेत देता है कि बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर जारी रहेगा, लेकिन संसाधनों के दबाव के चलते इसकी रफ्तार थोड़ी कम हो सकती है.

जीएसडीपी के मुकाबले कैपेक्स का स्तर

रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों का पूंजीगत खर्च सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के अनुपात में करीब 2.3 प्रतिशत से 2.4 प्रतिशत के बीच रह सकता है. यह आंकड़ा दर्शाता है कि राज्यों की प्राथमिकता अभी भी विकास परियोजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर केंद्रित है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके.

राजस्व खर्च बढ़ने का दबाव

हालांकि पूंजीगत खर्च प्राथमिकता बना रहेगा, लेकिन राज्यों के सामने राजस्व खर्च का दबाव भी बढ़ता नजर आ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, जनकल्याणकारी योजनाओं पर बढ़ता खर्च और ऊर्जा व कमोडिटी की ऊंची कीमतें राज्यों के बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती हैं. इससे राज्यों के लिए संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

राजस्व प्राप्ति की रफ्तार धीमी

राज्यों की आय यानी राजस्व प्राप्ति में भी अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि का अनुमान जताया गया है. वित्त वर्ष 2026 में राजस्व प्राप्ति 6.2 प्रतिशत और FY27 में 7.9 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है, जो नॉमिनल GSDP की तुलना में कम है. इसका एक कारण केंद्र से मिलने वाले अनुदानों में संभावित कमी और बाहरी आर्थिक कारकों का प्रभाव बताया गया है. पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर भी भारत के वित्तीय ढांचे पर पड़ सकता है.

ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण केंद्र सरकार पर सब्सिडी का दबाव बढ़ सकता है, जिससे राज्यों को मिलने वाले केंद्रीय हस्तांतरण की वृद्धि दर प्रभावित हो सकती है.

बढ़ सकता है राजकोषीय दबाव

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि सीमित संसाधनों के चलते राज्यों के राजकोषीय घाटे और कर्ज में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है. केयरएज रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर प्रसन्ना कृष्णन के अनुसार, राजस्व घाटा FY25 में GSDP के 0.8 प्रतिशत से बढ़कर FY27 तक करीब 1.2% तक पहुंच सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों के लिए राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना बेहद जरूरी होगा, ताकि वे कल्याणकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन बना सकें.

किन राज्यों ने बनाए रखा फोकस

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ बड़े राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना ने मध्यम राजस्व वृद्धि के बावजूद पूंजीगत खर्च को प्राथमिकता दी है. यह दर्शाता है कि इन राज्यों का फोकस अब भी इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और दीर्घकालिक विकास पर बना हुआ है.

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