39,000 से ज्यादा उपभोक्ताओं ने LPG छोड़ PNG अपनाई, 4.85 लाख नए कनेक्शन जुड़े

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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LPG to PNG Shift India: देश में ऊर्जा के इस्तेमाल का तरीका तेजी से बदल रहा है. जहां पहले ज्यादातर घरों में खाना बनाने के लिए एलपीजी सिलेंडर ही एकमात्र विकल्प हुआ करता था, वहीं अब पाइप वाली प्राकृतिक गैस यानी पीएनजी तेजी से अपनी जगह बना रही है. सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 39,000 से अधिक उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं और पीएनजी को अपनाया है.

यह बदलाव सिर्फ सुविधा के लिए नहीं, बल्कि एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य एलपीजी पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा की स्थिरता बनाए रखना और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है. यह पूरा अभियान MYPNG प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित किया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को आसानी से एलपीजी से पीएनजी में शिफ्ट होने की सुविधा मिल रही है. इससे प्रक्रिया पारदर्शी भी बनी है और तेजी से बदलाव संभव हो पाया है.

सरकार की रणनीति: सिर्फ बदलाव नहीं, पूरी व्यवस्था पर फोकस

सरकार इस बदलाव को सिर्फ एक विकल्प के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इसे एक व्यापक ऊर्जा सुधार के रूप में लागू कर रही है. इसके तहत जरूरी चीजों के एक्ट, 1955 और एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर, 2000 के प्रावधानों के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर सख्त निगरानी रखी जा रही है. राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करें और जमाखोरी या कालाबाजारी जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं. केंद्र सरकार ने कई दौर की समीक्षा बैठकों के जरिए इस जिम्मेदारी को दोहराया है.

अप्रैल की शुरुआत में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें राज्यों को सख्त निर्देश दिए गए कि वे नियमित प्रेस ब्रीफिंग करें, सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों का खंडन करें और प्रशासनिक स्तर पर सख्ती बढ़ाएं.

छापेमारी और कड़ी कार्रवाई से संदेश साफ

सरकार की सख्ती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिर्फ 18 अप्रैल को ही पूरे देश में 2,400 से ज्यादा स्थानों पर छापेमारी की गई. इन कार्रवाइयों का मकसद एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक लगाना था. इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने भी अपनी निगरानी बढ़ा दी है. नियमों का उल्लंघन करने वाले 264 एलपीजी डीलरशिप पर जुर्माना लगाया गया है, जबकि 67 डीलरशिप को निलंबित कर दिया गया है. इन कदमों से यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि ऊर्जा क्षेत्र में किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

शहरों में तेजी से फैल रहा PNG नेटवर्क

सरकार का फोकस अब शहरों में पाइप गैस नेटवर्क के विस्तार पर है. इसके लिए बुनियादी ढांचे के विकास की गति तेज कर दी गई है. मार्च 2026 से अब तक 4.85 लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शन चालू किए जा चुके हैं, जबकि 5.43 लाख से ज्यादा लोगों ने इसके लिए पंजीकरण कराया है.

यह आंकड़े बताते हैं कि लोगों का झुकाव तेजी से पीएनजी की ओर बढ़ रहा है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए विशेष तीन महीने के त्वरित कार्य-ढांचे के तहत गैस पाइपलाइन और अन्य जरूरी मंजूरियों को तेजी से दिया जा रहा है, ताकि नेटवर्क विस्तार में कोई रुकावट न आए.

कंपनियों की भूमिका और प्रोत्साहन

इस बदलाव को बढ़ावा देने में गैस सप्लाई कंपनियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं. इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड, महानगर गैस लिमिटेड, गेल गैस और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी कंपनियां घरेलू और व्यावसायिक दोनों तरह के उपभोक्ताओं को अलग-अलग प्रोत्साहन दे रही हैं. इन प्रोत्साहनों में आसान कनेक्शन प्रक्रिया, कम लागत और बेहतर सेवाएं शामिल हैं, जिससे लोग पीएनजी अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं.

राज्यों को भी जोड़ा गया इस बदलाव से

सरकार ने इस योजना को और प्रभावी बनाने के लिए राज्यों को भी इसमें सीधे तौर पर जोड़ा है. अब राज्यों को मिलने वाली अतिरिक्त कमर्शियल एलपीजी सप्लाई को पीएनजी नेटवर्क के विस्तार से जोड़ दिया गया है.

इस सुधार आधारित मॉडल का असर भी दिखने लगा है. अब तक 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसका लाभ मिल चुका है, जिससे राज्यों में भी इस दिशा में तेजी आई है.

गैस सप्लाई बनी हुई है मजबूत

सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि प्राकृतिक गैस की उपलब्धता में किसी तरह की कमी न हो. घरेलू पीएनजी और सीएनजी वाहनों के लिए 100 प्रतिशत गैस सप्लाई जारी रखी गई है.

उर्वरक संयंत्रों के लिए गैस आवंटन बढ़ाकर उनकी जरूरत का लगभग 95 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि अन्य औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए यह आंकड़ा करीब 80 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इससे साफ है कि सप्लाई सिस्टम को मजबूत रखते हुए मांग को संतुलित करने की कोशिश की जा रही है.

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