India Terror Threat: भारत के खिलाफ नई साजिश में जुटा इस्लामिक स्टेट, पड़ोसी देशों से रची जा रही हमले की योजना

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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India Terror Threat: आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी आईएस अब भारत को निशाना बनाने के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा है. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, संगठन अब सीधे भारत के भीतर भर्ती करने के बजाय पड़ोसी देशों में मौजूद अपने कट्टरपंथी मॉड्यूल का इस्तेमाल कर भारत में दुष्प्रचार और आतंकी हमले कराने की तैयारी कर रहा है. सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका में मौजूद इस्लामिक स्टेट के मॉड्यूल को भारत के खिलाफ सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है.

एजेंसियों के अनुसार, संगठन की रणनीति भारत के भीतर विदेशी चरमपंथियों के जरिए बड़े हमले करवाने की है, ताकि डर का माहौल बनाया जा सके और बाद में इसे भर्ती अभियान के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके. खुफिया अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने डी-रेडिकलाइजेशन अभियान और कड़ी निगरानी के जरिए कई युवाओं को संगठन में शामिल होने से रोका है. लेकिन अब इस्लामिक स्टेट ने अपनी रणनीति बदलते हुए सीमा पार मौजूद नेटवर्क पर ज्यादा फोकस करना शुरू कर दिया है.

भारत से भी गए थे कई लोग

जब साल 2013 के अंत में इस्लामिक स्टेट ने वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी, तब भारत से भी कई लोग संगठन में शामिल होने के लिए देश छोड़कर चले गए थे. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय एजेंसियों ने कई लोगों को सीरिया, इराक और अफगानिस्तान जाकर संगठन में शामिल होने से रोकने में सफलता हासिल की है.

इसके साथ ही सुरक्षा एजेंसियों ने कई सफल डी-रेडिकलाइजेशन अभियान भी चलाए, जिनके जरिए उन लोगों को मुख्यधारा में वापस लाया गया जो कट्टरपंथ की ओर बढ़ रहे थे या संगठन में शामिल होने की योजना बना रहे थे. एक खुफिया ब्यूरो कर्मी के अनुसार, “भारत में यह समस्या काफी हद तक नियंत्रण में है, लेकिन अब संगठन अन्य देशों से कट्टरपंथी तत्वों को भारत में भेजने की कोशिश कर रहा है।”

पड़ोसी देशों में बनाए गए मॉड्यूल

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, इस्लामिक स्टेट ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका में अपने अलग-अलग मॉड्यूल स्थापित कर रखे हैं. इन मॉड्यूल्स का इस्तेमाल भारत के अलग-अलग हिस्सों में कट्टरपंथ फैलाने और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जा सकता है. सूत्रों के अनुसार, श्रीलंका मॉड्यूल का असर तमिलनाडु और मंगलुरु में पहले भी देखने को मिल चुका है. दोनों जगहों पर इस्लामिक स्टेट से प्रभावित कट्टरपंथी व्यक्तियों ने हमले की कोशिश की थी, हालांकि वे असफल रहे. जांच में सामने आया था कि आरोपी जेमेशा मुबीन और मोहम्मद शारिक दोनों को श्रीलंका के एक ही व्यक्ति ने कट्टरपंथी बनाया था.

ईस्टर बम धमाकों से जुड़ा कनेक्शन

खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, श्रीलंका में हुए ‘ईस्टर बम धमाकों’ का मास्टरमाइंड जहरान हाशिम वहां इस्लामिक स्टेट का प्रमुख था. बताया गया कि वह दक्षिण भारत भी आया था और काफी समय तक यहां रहा था. इसी दौरान उसने जेमेशा मुबीन और मोहम्मद शारिक को कट्टरपंथ की ओर धकेला.

एजेंसियों का मानना है कि दक्षिण भारत में सक्रिय नेटवर्क को मजबूत करने के लिए श्रीलंका और मालदीव के जरिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं. एक अधिकारी ने कहा कि श्रीलंका से खतरा पहले की तुलना में कम जरूर हुआ है, लेकिन यह मानना गलत होगा कि वहां संगठन पूरी तरह खत्म हो चुका है.

बंगाल और बिहार पर खास नजर

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश में मौजूद मॉड्यूल पश्चिम बंगाल और बिहार में रिक्रूट्स भेजने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. दूसरी ओर, दक्षिण भारत के राज्यों में श्रीलंका और मालदीव के जरिए चरमपंथी तत्वों को भेजने की तैयारी की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि बांग्लादेश को इस काम के लिए सबसे मुफीद माना जा रहा है.

सूत्रों के मुताबिक, इस्लामिक स्टेट के मुख पत्र ‘दाबिक’ के हाल के संस्करण में “बंगाल में जिहाद का फिर से शुरू होना” शीर्षक से एक लेख भी प्रकाशित किया गया था. एजेंसियों का मानना है कि इसका उद्देश्य युवाओं को कट्टरपंथ की ओर उकसाना था. अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार था जब बांग्लादेश में मौजूद इस्लामिक स्टेट मॉड्यूल भारत में अपना एजेंडा आगे बढ़ाने की कोशिश करता दिखाई दिया.

विदेशी चरमपंथियों के जरिए हमले की साजिश

खुफिया एजेंसियों का कहना है कि इस्लामिक स्टेट भारत में उसी पैमाने पर हमला करना चाहता है जैसा श्रीलंका में ईस्टर बम धमाकों के दौरान किया गया था. संगठन चाहता है कि हमले विदेशी चरमपंथियों के जरिए कराए जाएं. इसके पीछे दो वजहें बताई जा रही हैं. पहली, विदेशी लड़ाकों के बारे में सुरक्षा एजेंसियों के पास सीमित जानकारी होती है. दूसरी, भारत की तुलना में विदेशी लड़ाकों को कट्टरपंथ की ओर धकेलना ज्यादा आसान माना जाता है.

एजेंसियों के मुताबिक, संगठन का मकसद सिर्फ हमला करना नहीं है, बल्कि ऐसे हमलों को भर्ती अभियान के तौर पर इस्तेमाल करना भी है. सूत्रों का कहना है कि इस्लामिक स्टेट अपने कुछ भारतीय मॉड्यूल को लगातार भारत में हमले करने के लिए उकसा रहा है, लेकिन वे कई बार असफल हो चुके हैं. संगठन को लगता है कि अगर विदेशी मॉड्यूल भारत में कोई बड़ा हमला करते हैं, तो उससे भारतीय ऑपरेटिव्स को भी प्रेरणा मिल सकती है और संगठन को नए भर्ती अभियान चलाने में मदद मिलेगी.

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