पीएम मोदी की ईंधन बचाने की अपील का उद्योग जगत ने किया समर्थन, जानिए क्‍या कहा ?

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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PM Modi Fuel Saving Appeal: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से की गई अपील को अब देश के बड़े उद्योगपतियों का भी समर्थन मिलने लगा है. सोमवार को कई प्रमुख उद्योगपतियों और आर्थिक विशेषज्ञों ने प्रधानमंत्री की उस अपील का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने ईंधन की खपत कम करने, गैर-जरूरी खर्चों से बचने और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने की बात कही थी.

उद्योग जगत के दिग्गजों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक अनुशासन और आत्मनिर्भरता पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. उनका मानना है कि अगर देश ईंधन की खपत कम करता है और विदेशी मुद्रा का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करता है, तो इससे भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में भाजपा की जनसभा को संबोधित करते हुए देशवासियों से ईंधन बचाने, वर्क फ्रॉम होम को फिर से अपनाने और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की थी. अब उसी बयान को लेकर उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.

टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन ने किया समर्थन

टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आत्मनिर्भरता और विवेकपूर्ण उपभोग पर दिए गए बयान का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए भारत को अपनी आर्थिक ताकत और संसाधनों के उपयोग पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. उनके मुताबिक, अगर देश समय रहते सावधानी बरतता है तो आने वाले आर्थिक दबावों का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है. वेणु श्रीनिवासन का मानना है कि प्रधानमंत्री की अपील केवल बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी एक अहम कदम है.

सुनील भारती मित्तल ने क्या कहा?

भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने भी प्रधानमंत्री की इस अपील का समर्थन करते हुए कहा कि वर्तमान समय भारत के लिए आर्थिक अनुशासन और घरेलू शक्ति पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर है. उन्होंने कहा कि दुनिया जिस तरह की अनिश्चित परिस्थितियों से गुजर रही है, उसमें हर देश को अपने संसाधनों का सोच-समझकर इस्तेमाल करना होगा. भारत के लिए भी यह समय आत्मनिर्भरता और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर फोकस करने का है. उद्योग जगत का मानना है कि यदि देश में ईंधन की खपत और गैर-जरूरी आयात कम होते हैं, तो इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा.

SBI के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भी दिया बयान

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि पीएम मोदी की अपील किसी भी प्रकार की राशनिंग लागू करने के बजाय भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा पर केंद्रित थी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का उद्देश्य लोगों में जागरूकता पैदा करना है ताकि देश वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सके. विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ सकता है.

पीएम मोदी ने देशवासियों से क्या अपील की?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में भाजपा की जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था, “वर्तमान परिस्थितियों में, विदेशी मुद्रा बचाना देश के लिए महत्वपूर्ण हो गया है.” आयातित ईंधन पर भारत की निर्भरता का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ईंधन की खपत कम करने से बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने में मदद मिलेगी. उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाई गई डिजिटल कार्य पद्धतियों, जैसे कि वर्क फ्रॉम होम, वर्चुअल कॉन्फ्रेंस और ऑनलाइन बैठकों को फिर से शुरू करने की भी वकालत की.

इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्रा, डेस्टिनेशन वेडिंग और विदेश में छुट्टियां मनाने से बचने की अपील की. उन्होंने लोगों से घरेलू पर्यटन और देश के भीतर होने वाले समारोहों को बढ़ावा देने की बात कही. प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए अगले वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी टालने का आग्रह भी किया. साथ ही उन्होंने परिवारों को खाद्य तेल की खपत कम करने की सलाह दी और कहा कि इससे आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ व्यक्तिगत स्वास्थ्य को भी फायदा होगा.

वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी चिंता

दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण दुनियाभर में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है. तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ने की आशंका के बीच भारत जैसे देशों के सामने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने की चुनौती बढ़ गई है.

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. ऐसे में अगर वैश्विक तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है. इसी वजह से सरकार अब बचत, आत्मनिर्भरता और संसाधनों के सीमित उपयोग पर जोर देती नजर आ रही है.

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