Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है. सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को बाजार में लगातार चौथे दिन भारी गिरावट दर्ज की गई. वैश्विक तनाव, महंगे कच्चे तेल, कमजोर रुपये और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.
दिनभर के कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 1,100 अंकों से ज्यादा टूट गया और 74,894.39 के निचले स्तर तक पहुंच गया. वहीं निफ्टी भी करीब 1 प्रतिशत फिसलकर 23,493.45 तक आ गया. बाजार में आई इस बड़ी गिरावट से निवेशकों की संपत्ति को तगड़ा झटका लगा है.
चार दिन में बाजार से उड़ गए 13 लाख करोड़
लगातार गिरते बाजार ने निवेशकों की कमाई पर बड़ा असर डाला है. पिछले चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 3,000 अंक टूट चुका है, जबकि निफ्टी में 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है. इस दौरान बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग 13 लाख करोड़ रुपये घट गया. छोटे और मझोले शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला, जहां निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली की.
क्यों टूटा बाजार?
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार पर कई नकारात्मक कारण एक साथ असर डाल रहे हैं. सबसे बड़ी चिंता पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतें हैं. अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है. इससे भारत जैसे तेल आयातक देशों की चिंता बढ़ गई है. महंगे कच्चे तेल का सीधा असर महंगाई, परिवहन लागत और कंपनियों के खर्च पर पड़ता है. यही वजह है कि निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है.
रुपये की रिकॉर्ड गिरावट ने बढ़ाई चिंता
भारतीय मुद्रा में कमजोरी भी बाजार पर भारी पड़ रही है. मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 35 पैसे टूटकर 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. साल की शुरुआत में रुपया करीब 90 प्रति डॉलर के आसपास था, लेकिन कुछ ही महीनों में इसमें 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है. कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भी चिंता का कारण बनता जा रहा है.
विदेशी निवेशकों ने बढ़ाई बिकवाली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. पिछले साल जुलाई से अब तक विदेशी निवेशकों ने करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये भारतीय बाजार से निकाल लिए हैं. सिर्फ मई महीने में ही लगभग 19,500 करोड़ रुपये की बिकवाली की गई है. लगातार हो रही इस निकासी ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया है.
पीएम मोदी की अपील का भी असर
विश्लेषकों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील का असर भी कुछ सेक्टरों में दिखाई दिया है. प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल, डीजल और गैस का सीमित इस्तेमाल करने तथा एक साल तक सोने की खरीद टालने की सलाह दी थी. इसके बाद ज्वेलरी, ट्रैवल और होटल सेक्टर के शेयरों में दबाव बढ़ गया. निवेशकों को आशंका है कि यदि उपभोग घटा तो इन क्षेत्रों की कमाई प्रभावित हो सकती है.
सुरक्षित निवेश की ओर भाग रहे निवेशक
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी के कारण विदेशी निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं. इससे उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ रहा है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशकों के बीच डर और सतर्कता का माहौल बना रहेगा.
जब तक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती और पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में बड़ी तेजी की उम्मीद कम है. हालांकि, जानकारों का कहना है कि यदि वैश्विक हालात सुधरते हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती है, तो भारतीय बाजार फिर से मजबूती दिखा सकता है.
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