सरकार ने CNG, LNG और हाइड्रोजन डिस्पेंसर के सत्यापन का दायरा बढ़ाया, नए शुल्क भी किए लागू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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देश में तेजी से बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और स्वच्छ ईंधन के बढ़ते इस्तेमाल के बीच केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी (सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013 में संशोधन किया है. इस बदलाव का उद्देश्य भारत की वजन और माप व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना, सत्यापन से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार करना और आधुनिक ईंधन प्रणालियों को बेहतर तरीके से नियमन के दायरे में लाना है.

सरकार का मानना है कि इस कदम से ईंधन वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी होगी और लोगों को अधिक भरोसेमंद सेवाएं मिल सकेंगी. साथ ही स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा.

सरकारी-अनुमोदित परीक्षण केंद्रों का दायरा बढ़ाया गया

नए संशोधनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरकार ने सरकारी-अनुमोदित परीक्षण केंद्रों यानी जीएटीसी के कार्यक्षेत्र को पहले से अधिक व्यापक बना दिया है. अब इन केंद्रों के जरिए अतिरिक्त ईंधन वितरण प्रणालियों का सत्यापन और पुनः सत्यापन भी किया जा सकेगा. सरकार को उम्मीद है कि इससे देशभर में सत्यापन सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी और लोगों तथा उद्योगों को इस प्रक्रिया में आसानी होगी. अभी तक कई क्षेत्रों में सत्यापन सुविधाएं सीमित थीं, लेकिन नए बदलाव के बाद इन सेवाओं तक पहुंच बढ़ने की संभावना है.

राज्य सरकारों को भी दिए गए नए अधिकार

सरकार ने इस संशोधन के तहत राज्यों को भी अधिक अधिकार दिए हैं. अब राज्य सरकारें अपने नियमों और आवश्यकताओं के अनुसार जीएटीसी के माध्यम से सत्यापन के लिए वजन और माप की अतिरिक्त श्रेणियों को अधिसूचित कर सकेंगी. इससे राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के हिसाब से फैसले लेने में आसानी होगी. साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में आधुनिक उपकरणों को नियामक ढांचे में शामिल करने का रास्ता भी खुल सकता है.

पेट्रोल, डीजल और स्वच्छ ईंधन डिस्पेंसर के लिए तय किया गया शुल्क

सरकार ने डिस्पेंसर सिस्टम के सत्यापन के लिए शुल्क भी तय कर दिया है. पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर के सत्यापन के लिए शुल्क प्रति नोजल 5 हजार रुपये निर्धारित किया गया है. वहीं स्वच्छ ईंधन से जुड़े डिस्पेंसर जैसे सीएनजी, एलपीजी, एलएनजी और हाइड्रोजन डिस्पेंसर के लिए यह शुल्क प्रति नोजल 10 हजार रुपये रखा गया है. सरकार का मानना है कि इससे ईंधन वितरण में गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.

पांच नई श्रेणियों को नियमों में किया गया शामिल

संशोधित नियमों के तहत सरकार ने डिस्पेंसिंग सिस्टम की पांच नई श्रेणियों को भी सूची में जोड़ा है. अब पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर, सीएनजी डिस्पेंसर, एलपीजी डिस्पेंसर, एलएनजी डिस्पेंसर और हाइड्रोजन डिस्पेंसर का सत्यापन भी सरकारी-अनुमोदित परीक्षण केंद्रों द्वारा किया जा सकेगा. इन नई श्रेणियों को जोड़े जाने के बाद जीएटीसी अब लीगल मेट्रोलॉजी ढांचे के अंतर्गत कुल 23 प्रकार के वजन और माप उपकरणों का सत्यापन और पुनः सत्यापन कर सकेंगे. इससे ईंधन क्षेत्र में इस्तेमाल हो रही आधुनिक तकनीकों को भी नियामक व्यवस्था के तहत बेहतर तरीके से शामिल किया जा सकेगा.

आखिर क्या होते हैं जीएटीसी?

जीएटीसी यानी सरकारी-अनुमोदित परीक्षण केंद्र ऐसी विशेष संस्थाएं होती हैं जिनके पास लीगल मेट्रोलॉजी कानून के तहत वजन और माप उपकरणों के सत्यापन और पुनः सत्यापन के लिए जरूरी तकनीकी क्षमता और बुनियादी सुविधाएं होती हैं. इन केंद्रों का मुख्य काम यह सुनिश्चित करना होता है कि विभिन्न उपकरण सही माप और सही मात्रा दिखा रहे हैं या नहीं. इससे उपभोक्ताओं को सही मात्रा में सेवाएं और उत्पाद मिल सकें.

निजी प्रयोगशालाओं को भी मिलेगा लाभ

उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार योग्य निजी प्रयोगशालाओं और उद्योगों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा. इससे देश की कुल सत्यापन क्षमता बढ़ेगी और लोगों तक सेवाओं की पहुंच पहले से अधिक बेहतर हो सकेगी. इससे उद्योगों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है क्योंकि उन्हें सत्यापन के लिए कम समय और बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं.

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