फतेहपुरः पिता-पुत्र को जिंदा जलाने का मामला, कोर्ट ने तीन दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Fatehpur Crime News: फतेहपुर जिले के गाजीपुर थाना क्षेत्र में 14 वर्ष पहले हुई पिता-पुत्र को जिंदा जलाकर मार डालने की सनसनीखेज वारदात में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट संख्या-द्वितीय की अपर सत्र न्यायाधीश पूजा विश्वकर्मा ने बहनोई-साले सहित तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इसके साथ ही प्रत्येक पर 45-45 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है.

बताया गया है कि मार्च 2011 में गाजीपुर थाना क्षेत्र के चक काजीपुर गांव में सुरेश विश्वकर्मा के परिवार की एक लड़की लापता हो गई थी. इस मामले में सूर्यकली के परिवार के पिंटू पर शक जताया जा रहा था. आरोप है कि लड़की की तलाश में तत्कालीन चौकी प्रभारी सहित पुलिसकर्मी भी गांव पहुंचे थे और घर की तलाशी ली गई थी.

पीड़िता सूर्यकली के अनुसार, पुलिस के लौटने के बाद सुरेश विश्वकर्मा, राजेंद्र सहित कई लोगों ने उनके पति लालता प्रसाद दीक्षित और बेटे अनिल को घेर लिया. जान बचाने के लिए दोनों घर के अंदर छिप गए, लेकिन आरोपियों ने बाहर से कुंडी बंद कर घर में आग लगा दी. आग की चपेट में आने से लालता प्रसाद की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से झुलसे बेटे अनिल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

घटना के बाद तत्कालीन चौकी इंचार्ज सहित 15 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था, लेकिन विवेचना के दौरान 12 लोगों के नाम हटा दिए गए और केवल तीन आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया. अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद कृष्णपाल, सुरेश और राजेंद्र को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई.

(रिपोर्ट, यश द्विवेदी)

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