New Delhi: लेबनान के मामले में अब अमेरिका और इजरायल के बीच विवाद चल रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान युद्ध से निकलने के लिए चाह रहे हैं कि लेबनान-इजरायल के बीच शांति बने, लेकिन नेतन्याहू इसके लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं. अब एक नया विवाद जन्म लेता हुआ दिख रहा है. अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इजरायल ही अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी कर रहा है.
संवेदनशील जानकारियों पर प्रतिबंध
माना जा रहा है कि पेंटागन भविष्य में इजरायल के साथ साझा की जाने वाली कुछ संवेदनशील जानकारियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगा सकता है. हालांकि अमेरिका और इजरायल के बीच जासूसी के आरोप कोई नई बात नहीं हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 के अंत से ऐसी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई. इन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इजरायल वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी कर रहा है और इसके बाद हड़कंप मचा हुआ है.
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच बहस
दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता हुआ दिख रहा है, वो भी ऐसे वक्त में, जब पहले ही ट्रंप और नेतन्याहू के बीच लेबनान को लेकर बहस हो चुकी है. इन रिपोर्टों के बाद अमेरिका में सुरक्षा एजेंसियों के बीच चिंता बढ़ गई है और दोनों देशों के रिश्तों में तनाव के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं. वैसे इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद इस तरह के हथकंडों का बखूबी इस्तेमाल करके जासूसी करती है, जिसके उदाहरण पहले भी सामने आ चुके हैं.
इजरायल ने इन आरोपों से किया इनकार
रिपोर्ट बताती हैं कि अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने इजरायल से जुड़े जासूसी खतरे के स्तर को बढ़ाकर सबसे ऊंचे क्रिटिकल स्तर पर पहुंचा दिया है. इसका मतलब है कि अमेरिकी एजेंसियां इस खतरे को बेहद गंभीर मान रही हैं. हालांकि इजरायल ने इन आरोपों से इनकार किया है. बताया जा रहा है कि इजरायल ने ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारी एल्ब्रिज कोल्बी और उनके सहयोगी माइकल डीमिनो सहित कई बड़े अधिकारियों की गतिविधियों और बातचीत पर नजर रखने की कोशिश की है.
ट्रंप प्रशासन की रणनीति और ईरान के साथ बातचीत
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इजरायल ट्रंप प्रशासन की रणनीति और ईरान के साथ बातचीत को लेकर बदलते रुख की जानकारी हासिल करना चाहता है. अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) और अन्य सैन्य खुफिया इकाइयों की रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के हफ्तों में इजरायल की जासूसी गतिविधियां बढ़ी हैं. रिपोर्ट में अमेरिकी सैन्य कर्मियों और सरकारी अधिकारियों की निगरानी की कोशिशों का भी जिक्र किया गया है.
सॉफ्टवेयर गुप्त रूप से डाला
एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इजरायल में तैनात कुछ अमेरिकी रक्षा कर्मियों को पता चला कि उनके मोबाइल फोन में उनकी बातचीत सुनने वाला सॉफ्टवेयर गुप्त रूप से डाला गया था. इसी वजह से कई वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी इजरायल यात्रा के दौरान अस्थायी या विशेष फोन का इस्तेमाल करते हैं. इस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान युद्ध और लेबनान में सैन्य अभियानों को लेकर अलग-अलग राय रही है. ऐसे में नई खुफिया चेतावनियां दोनों देशों के सैन्य सहयोग को प्रभावित कर सकती हैं.
इसे भी पढ़ें. सूरत में हादसाः जहरीली गैस से चार मजदूरों की मौत, कर रहे थे ज्वेलरी फैक्ट्री के सेप्टिक टैंक की सफाई

