Pakistan Crime: पाकिस्तान से हैरान करने वाली खबर सामने आई है. यहां एक 13 वर्षीय ईसाई लड़की के कथित अपहरण, जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह से जुड़े मामले में अदालत के फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फैसलाबाद की एक अदालत ने नाबालिग लड़की की हिरासत उसी व्यक्ति को सौंप दी, जिस पर उसके अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप है. मानवाधिकार संगठन ‘वॉयस फॉर जस्टिस’ के अध्यक्ष जोसेफ जानसेन ने दावा किया कि अदालत ने यह फैसला उस समय सुनाया, जब लड़की की वास्तविक उम्र तय करने के लिए अदालत द्वारा आदेशित मेडिकल जांच अभी बाकी थी.
रिपोर्ट के अनुसार, 13 वर्षीय अंबर नदीम ने अदालत में दिए एक हलफनामे में कहा कि उसने अपनी इच्छा से इस्लाम कबूल किया और मोहसिन लियाकत से शादी की है. साथ ही उसने यह भी कहा कि उसका अपहरण नहीं हुआ था. इसी बयान के आधार पर अदालत ने आरोपी मोहसिन लियाकत को जमानत दे दी. इसके बाद लड़की आरोपी के परिजनों और वकीलों के साथ अदालत से चली गई, जबकि उसके माता-पिता अदालत परिसर में मौजूद रहे.
#Pakistan: Court Grants Custody of Abducted Christian Minor Girl Amber Nadeem to Accused of Abduction, Forced Conversion & Child Marriage — Activists Demand Protection and Justice
On 25 July 2026, Faisalabad Sessions Court granted custody of 13-year-old Christian girl Amber… pic.twitter.com/D9lUDYETaB
— Voice For Justice (@Voice4Justice7) July 29, 2026
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक दिन पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने लड़की ने कथित तौर पर कहा था कि आरोपी पक्ष ने उसे बालिग होने का झूठा बयान देने के लिए दबाव डाला था. इसके बाद आरोपी की ओर से धर्मांतरण और विवाह प्रमाणपत्र पेश किया गया, जिसमें लड़की की जन्मतिथि जून 2008 दर्ज थी. हालांकि, लड़की के माता-पिता के मुताबिक, उनकी शादी वर्ष 2012 में हुई थी. इस विरोधाभास को देखते हुए मजिस्ट्रेट ने लड़की की उम्र निर्धारित करने के लिए मेडिकल जांच के आदेश दिए थे और उसे सरकारी शेल्टर होम भेजने का निर्देश दिया था.
नवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाया है कि मेडिकल रिपोर्ट आने से पहले ही आरोपी को जमानत और लड़की की हिरासत कैसे दे दी गई. इसी महीने यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की नाबालिग लड़कियों के कथित अपहरण, जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह की घटनाओं की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था. प्रस्ताव में 13 वर्षीय मारिया शाहबाज़ के मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें कथित तौर पर अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह का आरोप है. यूरोपीय सांसदों ने पीड़िता को कानूनी सहायता, परिवार तक पहुंच और मनोवैज्ञानिक सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की है.

