समय पर इलाज से ठीक हो सकता है कैंसर! इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

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Health Tips: कैंसर के शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए तो इसका सफल इलाज संभव है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और सही इलाज से इस जानलेवा बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित या पूरी तरह खत्म किया जा सकता है. ज्यादातर कैंसर मरीजों की पहचान तब होती है, जब बीमारी तीसरी या चौथी स्टेज में पहुंच चुकी होती है. कैंसर को दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक माना जाता है. कैंसर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने लोगों को चेतावनी दी है कि शरीर में दिखने वाले कुछ असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी

भारत में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि मरीजों को इसके लक्षण पता ही नहीं लग पाते. अस्पताल देरी से पहुंचते है. एक कैंसर इंस्टीट्यूट के एक्सपर्ट डॉक्टर के अनुसार, कैंसर लाइलाज नहीं है. अगर इस बीमारी को शुरुआती दौर में ही पकड़ लिया जाए, तो न सिर्फ इसका इलाज बेहद आसान हो जाता है, बल्कि मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना भी कई गुना बढ़ जाती है.

मरीज को नया जीवन

डॉक्टरों के मुताबिक, कुछ कैंसर ऐसे हैं जिन्हें अगर पहले चरण में ही पहचान लिया जाए, तो मरीज को नया जीवन मिल सकता है. इनमें Oral Cancer, Breast Cancer, Cervical Cancer गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर और Colorectal Cancer आंतों का कैंसर शामिल है. अगर समय पर जांच न हो, तो कैंसर ट्यूमर अपनी जगह से बढ़कर शरीर के दूसरे अंगों (जैसे लिवर, फेफड़े या हड्डियों) में फैलने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘मेटास्टेसिस’ कहा जाता है. इसके बाद इलाज काफी जटिल हो जाता है.

आम समस्या मानकर नजरअंदाज

लोग कैंसर के शुरुआती संकेतों को रोजमर्रा की आम समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. समाज में कैंसर को लेकर एक अनजाना डर और कलंक (स्टिग्मा) जुड़ा हुआ है. कई लोग इस खौफ में जीने लगते हैं कि अगर जांच कराई और कैंसर निकल आया तो क्या होगा? इसी डर से वे टेस्ट कराने से भागते हैं. भारत में हेल्थ चेकअप या कैंसर स्क्रीनिंग (लक्षण दिखने से पहले की जाने वाली जांच) को लेकर जागरूकता न के बराबर है. लोग बीमारी गंभीर होने पर ही अस्पताल का रुख करते हैं.

इन रेड फ्लैग्स को कभी न करें इग्नोर

दवा लेने के बाद भी हफ्तों तक खांसी का ठीक न होना, बिना किसी डाइट या एक्सरसाइज के शरीर का वजन तेजी से गिरना, मुंह या जीभ में ऐसे छाले जो लंबे समय से दवा के बाद भी न भर रहे हों (विशेषकर तंबाकू/सुपारी खाने वालों में), भरपूर आराम और अच्छी डाइट के बावजूद हर वक्त शरीर में कमजोरी और थकावट महसूस होना, शरीर के किसी भी हिस्से (जैसे ब्रेस्ट या गले) में बिना दर्द वाली अजीब गांठ का उभरना.

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