New Delhi: बांग्लादेश एक बार फिर भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है. ऐसे में सर्तकता बेहद जरूरी है. बांग्लादेश म्यांमार से लगी सीमा के नजदीक एक नया छावनी क्षेत्र विकसित करने की दिशा में धीरे-धीरे कदम बढ़ा रहा है. बांदरबन जिले के नाइखोंगछारी इलाके में यह गतिविधि चल रही है, जहां हथियारबंद रोहिंग्या समूहों की उपस्थिति लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई है. स्थानीय स्रोतों के मुताबिक सेना इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे की तैयारी कर रही है.
झंडे गाड़कर सीमांकन का काम जारी
चुने गए भूभाग पर झंडे गाड़कर सीमांकन का काम जारी है. यह जमीन नए सैन्य केंद्र के लिए आरक्षित की जा रही है. नाइखोंगछारी कॉक्स बाजार जिले के रामू के आसपास स्थित है, जहां बांग्लादेश सेना की दसवीं इन्फैंट्री डिवीजन का मुख्यालय पहले से कार्यरत है. बांदरबन जिले का अंतिम गांव केओकराडोंग तीन देशों- बांग्लादेश, म्यांमार और भारत के मिलन बिंदु के काफी करीब पड़ता है. यही वजह है कि बांग्लादेश का ये कदम भारत की भी टेंशन बढ़ाने वाला है.
सीमा पर मिजोरम का डुडुक्सोरा इलाका
भारतीय सीमा पर मिजोरम का डुडुक्सोरा इलाका आता है, जहां सीमा सुरक्षा बल की इकाई तैनात है. इसी सिलसिले में तेकनाफ से उत्तर की ओर सिल्खाली नामक छोटे तटीय गांव में भी गतिविधियां तेज हो गई हैं. यहां जमीन साफ करने और समतल करने का कार्य शुरू हो चुका है. सिल्खाली बंगाल की खाड़ी के किनारे बसा हुआ है और तेकनाफ से करीब 30 किलोमीटर दूर है.
सेना प्रमुख जनरल ने खुद इस इलाके का दौरा किया
नॉर्थईस्ट न्यूज के मुताबिक पिछले साल फरवरी में सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने खुद इस इलाके का दौरा किया और सप्लाई बेस के लिए उपयुक्त स्थान का चयन किया था. यह बेस सैन्य आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होने वाला है. सेना यहां पहले से ही तोपखाने के अभ्यास के लिए फायरिंग रेंज संचालित करती है. इसमें मुख्य रूप से तुर्की निर्मित फील्ड गनए एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम, मोर्टार और अन्य छोटे हथियार शामिल हैं.
आधुनिक ड्रोन खरीदने पर विचार
बांग्लादेश तुर्की से आधुनिक ड्रोन और वायु रक्षा प्रणालियां खरीदने पर विचार कर रहा है. ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि क्या नए छावनी क्षेत्र में इन तुर्की हथियारों की तैनाती भी की जाएगी. नाइखोंगछारी और सिल्खाली जैसे स्थानों पर सैन्य विस्तार की यह योजना सीमा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है. रोहिंग्या लड़ाकों की मौजूदगी वाले क्षेत्र में सेना की बढ़ती गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को प्रभावित कर सकती हैं.
भारत भी रखे हुए है इस पर नजर
तीन देशों की सीमा के पास होने के कारण भारत भी इस पर नजर रखे हुए है. जमीन की मार्किंग से लेकर सप्लाई बेस की स्थापना तक की तैयारियां बताती हैं कि योजना व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रही है, जो भारत को सतर्क रहने की वॉर्निंग दे रही है.
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