बंद हो जाएगी मुफ्त की कमाई! EU की रिपोर्ट ने खोली कंगाल पाकिस्तान की पोल, दी चेतावनी 

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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EU Ultimatum: पाकिस्तान में बलूचिस्तान और पीओके के साथ जो अत्याचार हो रहा है, वो अब इंटरनेशनल बेइज्जती का सबब बनता जा रहा है. हाल ही में पाकिस्तान को यूरोपीय संघ ने ऐसी तगड़ी फटकार लगाई है कि शहबाज शरीफ सरकार के हाथ-पांव फूल गए हैं. यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान को लेकर अपनी नई जीएसपी प्लस (GSP+) मूल्यांकन रिपोर्ट जारी की है, जिसमें
पाकिस्तान के अंदर गिरते मानवाधिकारों और कानून व्यवस्था की अब पोल खुल रही है. ऐसे में यूरोपीय संघ ने ऐसी तगड़ी फटकार लगाई है कि शहबाज शरीफ सरकार के हाथ-पांव फूल गए हैं. साथ ही EU ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि पाकिस्तान ने अपनी हरकतों में सुधार नहीं किया तो उसे मिलने वाली अरबों रुपये की बिजनेस में मिलने वाली बड़ी छूट हमेशा के लिए बंद कर दी जाएगी.

आखिर क्या है GSP+ 

दरअसल, यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान को लेकर अपनी नई जीएसपी प्लस (GSP+) यानी ‘जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेस प्लस’ मूल्यांकन रिपोर्ट जारी की है, जो यूरोपीय संघ की एक बेहद खास बिजनेस स्कीम है. इसके तहत EU दुनिया के कुछ विकासशील देशों को एक बहुत बड़ा फायदा देता है और ये तब होता है कि जब ये देश यूरोपीय देशों में अपना सामान निर्यात करते हैं, इस दौरान उनसे लिया जाने वाला आयात टैक्स या तो बिल्कुल जीरो कर दिया जाता है या फिर उसमें भारी छूट दी जाती है. इसका मकसद इन देशों की अर्थव्यवस्था और उनके बिजनेस को बढ़ावा देना होता है.

पाकिस्तान को 73.2 करोड़ यूरो की मिली छूट

बता दें कि पाकिस्तान साल 2014 से इस स्कीम का सबसे बड़ा लाभ लेने वाला देश रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ साल 2024 में ही पाकिस्तान को जीएसपी प्लस के तहत करीब 73.2 करोड़ यूरो यानी पाकिस्तानी करेंसी में अरबों रुपए की टैक्स छूट मिली है, जिसके बदौलत पाकिस्तान का कपड़ा उद्योग और चमड़ा उद्योग किसी तरह वेंटिलेटर पर चलते हुए सांसें ले पा रहे थे लेकिन अब EU ने इस मुफ्त की कमाई पर ताला लगाने की पूरी तैयारी कर ली है.

EU की रिपोर्ट ने खोली पोल

वही, अब यूरोपीय संघ का कहना है कि जब हम किसी देश को इतनी बड़ी आर्थिक छूट देते हैं, तो बदले में हम ये भी उम्मीद करते हैं कि वो देश मानवाधिकारों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान करेगा लेकिन पाकिस्तान की हालत इस मामले में बेहद शर्मनाक है. बता दें कि ईयू की नई रिपोर्ट में पाकिस्तान के कई काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोला गया है….
  • बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और फर्जी एनकाउंटर: रिपोर्ट में बेहद गंभीर चिंता जताते हुए कहा गया है कि बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में सेना और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा लोगों को जबरन गायब करना और फर्जी मुठभेड़ों में मार गिराना आम बात हो गई है.
  • पत्रकारों की आवाज दबाना: इसके अलावा पाकिस्तान में सच लिखने और बोलने वाले पत्रकारों पर लगातार केस दर्ज किए जा रहे हैं, उन्हें अगवा किया जा रहा है और जेलों में ठूंसा जा रहा है, जिससे अभिव्यक्ति की आजादी पूरी तरह खत्म हो चुकी है.
  • ईशनिंदा और साइबर कानूनों का दुरुपयोग: बता दें कि पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों और विरोधियों को फंसाने के लिए एक हथियार की तरह किया जा रहा है. साथ ही नए साइबर कानूनों के जरिए सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ बोलने वालों को भी चुप कराया जा रहा है.

सुधर जाओ वरना भुखमरी तय

ईयू ने पाकिस्तान को अपनी आदतों को सुधारने के लिए आखिरी मौका दिया है. उसने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि पाकिस्तान साल 2027 के बाद भी इस योजना का लाभ उठाना चाहता है तो उसे कागजी दावों से अलग जमीन पर ठोस सुधार करके दिखाने होंगे.
  • मानवाधिकारों की रक्षा: देश के हर नागरिक, चाहे वो किसी भी प्रांत का हो, उसके बुनियादी हक और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी.
  • अल्पसंख्यकों और महिलाओं की सुरक्षा: पाकिस्तान में हिंदू, ईसाई और अहमदिया जैसे अल्पसंख्यक समुदायों पर होने वाले अत्याचारों और जबरन धर्म परिवर्तन को तुरंत रोकना होगा.
  • बाल मजदूरी पर भी रोक: फैक्ट्रियों और ईंट-भट्टों में बच्चों से कराई जा रही जबरन मजदूरी को पूरी तरह खत्म करना होगा.
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता: अदालतों और जजों के काम में सेना और सरकार का दखल बंद करना होगा ताकि लोगों को सही मायने में न्याय मिल सके.

पाकिस्तान में मचेगा हाहाकार

इस दौरान यदि पाकिस्तान इन शर्तों को पूरा नहीं कर पाता है और यूरोपीय संघ उसके ऊपर से GSP+ का हाथ हटा लेगा, ऐसे में पाकिस्तान की तबाही निश्चित है. इसका सबसे बड़ा झटका पाकिस्तान के टेक्सटाइल सेक्टर को लगेगा, जो वहां के विदेशी मुद्रा भंडार का मुख्य जरिया है. जब पाकिस्तानी कपड़ों पर भारी टैक्स लगने लगेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में वो इतने महंगे हो जाएंगे कि कोई उन्हें खरीदेगा ही नहीं. नतीजन फैक्ट्रियां बंद हो जाएंगी, लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे और पाकिस्तान का जो थोड़ा-बहुत निर्यात बचा है, वो भी पूरी तरह ठप हो जाएगा.
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