नेपाल के विवादित सिक्कों को बदलेगी बालेन शाह सरकार, भारत के खिलाफ दिखाया गया था नक्शा

Must Read

New Delhi: नेपाल अपने एक रुपये के सिक्कों को बदलने जा रहा है. हाल ही में सरकार ने सिक्कों के नए डिजाइन को मंजूरी दी है. सरकार का यह फैसला भारत के साथ रिश्तों का माहौल बेहतर बनाने की कोशिश माना जा रहा है. हालांकि नेपाल सरकार का कहना है कि ये सिर्फ मुद्रा प्रणाली में नियमित सुधार की प्रक्रिया है. नेपाल के जिस एक रुपये के सिक्के को बदला जा रहा है, उसका जुड़ाव भारत और नेपाल सीमा विवाद से है.

विवादित नक्शा अब नहीं दिखेगा

इस सिक्के पर नेपाल का विवादित नक्शा अब नहीं दिखेगा. अब तक सिक्के पर जो नक्शा दिखता था उसमें लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को नेपाल में शामिल दिखाया जाता था, जबकि सुगौली संधि के तहत यह तीनों ही हिस्से भारत के पास हैं. नेपाल की मंत्रिपरिषद ने पिछले सप्ताह ही नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इसके तहत नए डिजाइन वाले एक रुपये और दो रुपये के सिक्के ढाले जाएंगे. इनमें एक रुपये की डिजाइन को बदला गया है.

नेपाल का विवादित नक्शा नहीं होगा

अब इन सिक्कों पर नेपाल का विवादित नक्शा नहीं होगा. इसी जगह लो घ्याकर मठ की तस्वीर लगाई जाएगी, जिसे गुम्बा भी कहते हैं. यह मठ मुस्तांग जिले के मारंग गांव में स्थित है. आठवीं शताब्दी में स्थापित यह मठ नेपाल के सबसे पुराने मठों में गिना जाता है. पीटीआई ने नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल के हवाले से लिखा है कि दोनों सिक्कों का वजन कम किया जाएगा और मिश्रित धातुओं के बजाय इन्हें स्टील से बनाया जाएगा.

भारत और नेपाल के बीच हुई संधि के तहत बांटा

भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद पिथौरागढ़ जिले के भारत नेपाल चीन त्रि जंक्शन के पास स्थित 370 वर्ग किमी क्षेत्र को लेकर है. यह इलाका भारत और नेपाल के बीच हुई सुगौली संधि के तहत बांटा गया है. इसके तहत कालीनदी ही दोनों देशों के बीच बंटवारे की लकीर है. नेपाल का कहना है कि काली नदी की शुरुआत लिम्पयाधुरा से होती है, इसीलिए यह लिपुलेख और कालापानी नेपाल के क्षेत्र हैं, जबकि भारत इस व्याख्या से सीमित नहीं है.

काली नदी का मुख्य स्रोत कालापानी गांव

दिल्ली का तर्क है कि काली नदी का मुख्य स्रोत कालापानी गांव है. इसीलिए ये तीनों क्षेत्र भूभाग का हिस्सा हैं. मई 2020 में भाई और नेपाल के बीच विवाद तब ज्यादा बढ़ गया था जब भारत ने धारचूला से लिपुलेख दर्रे तक जाने वाली सड़क को शुरू किया था. इस सड़क ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए लिपुलेख दर्रे तक पहुंच को काफी आसान बना दिया. भारत चीन सीमा के नजदीक होने की वजह से इसका रणनीतिक महत्व भी अधिक था.

संशोधित राजनीतिक नक्शा जारी

नेपाल ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि यह सड़क उस क्षेत्र से गुजरती है, जिस पर उसका दावा है. इसके तुरंत बाद तत्कालीन पीएम ने एक संशोधित राजनीतिक नक्शा जारी किया था. इसे संवैधानिक प्रक्रिया से मंजूरी दी गई और ये क्षेत्रीय दावों का प्रतीक बन गया. बाद में इसे एक रुपये के सिक्के पर शामिल किया गया. भारत ने इस नक्शे को कभी भी मान्यता नहीं दी.

इसे भी पढ़ें. दिल्ली के बाद अब पटना में छात्रों का राजभवन  मार्च, पुलिस ने किया लाठीचार्ज, छोड़े गए आंसू गैस

Latest News

27 October 2026 Ka Panchang: मंगलवार का पंचांग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Panchang 27 October 2026: 27 अक्टूबर 2026, मंगलवार को कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है. इस दिन अशून्य...

More Articles Like This