New Delhi: भारत ने रूस और यूक्रेन की जंग में मारे गए अपने चार नागरिकों की मौत की घटना को गंभीरता से लिया है. पहले दिल्ली में रूसी राजनयिक को तलब किया गया था. अब मनीला में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी रूस के अपने समकक्ष को तेवर दिखा दिए हैं. जयशंकर ने फिलीपींस की राजधानी में सर्गेई लावरोव से मुलाकात जरूर की लेकिन मौके पर चौका मारने से भी नहीं चूके. QUAD और ASEAN देशों की बैठक के बीच में जयशंकर ने धीरे से दांव खेल दिया.
द्विपक्षीय संबंधों की विस्तार से समीक्षा
जयशंकर ने एक्स पर इस मुलाकात की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, ‘रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों की विस्तार से समीक्षा की. इस क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर अपनी गहरी चिंता फिर से जताई. हमारी साझेदारी के कई पहलुओं पर चर्चा की. इसमें व्यापार और निवेश, ऊर्जा और कनेक्टिविटी, विज्ञान और तकनीक के साथ ही लोगों की आवाजाही शामिल हैं. इसके साथ ही यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र के हालात पर भी बातचीत की गई.’
डायलॉग पार्टनर के तौर पर शामिल
यह मुलाकात फिलीपींस की राजधानी मनीला में हुई. भारत यहां पर QUAD देशों की बैठक का हिस्सा बनने के लिए पहुंचा है. वहीं रूस यहां आसियान देशों की बैठक में डायलॉग पार्टनर के तौर पर शामिल हुआ है. चीन की नाक के नीचे इन देशों की बैठक हो रही है. भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों की यहां मुलाकात होगी. वहीं रूस की एंट्री भी दिखा रही है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अब पावर गेम पूरी तरह बदल चुका है.
मालवाहक जहाज पर मिसाइल हमले
तीन दिनों पहले यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट के पास एक मालवाहक जहाज पर मिसाइल हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी. उनकी पहचान अखिल जोयन, गुरप्रीत सिंह भट्ट, जगन सिंह और अभिषेक निषाद के रूप में हुई. 19 जुलाई की शाम ओडेसा बंदरगाह से रवाना हो रहे MV GOLDEN LEO पर मिसाइल अटैक हुआ. उस समय जहाज पर कुल 17 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें पांच भारतीय नागरिक भी शामिल थे.
किसी तरह से जान बचाने में सफल
इस हमले में 9 नाविकों की मौत हो गई, वहीं 8 अन्य किसी तरह से जान बचाने में सफल रहे. भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस हमले की बेहद सख्त लहजे में निंदा की है. भारत ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, निर्दोष नागरिक चालक दल की जान जोखिम में डालना और समुद्री व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता को बाधित करना पूरी तरह निंदनीय है.
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