नेपाल: सिंगापुर से पांच महीने बाद स्वदेश लौटे पूर्व पीएम देउबा, वापसी से पार्टी में फूट पड़ने का भी बढा खतरा

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Kathmandu: सिंगापुर से पांच महीने बाद गुरूवार को नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा स्वदेश लौटे. काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया. समर्थकों ने देउबा के समर्थन में नारे भी लगाए. पांच महीने पहले वे सिंगापुर में मेडिकल चेक-अप कराने गए थे. बता दें कि जनवरी में विवादित विशेष आम अधिवेशन के जरिए उन्हें पार्टी नेतृत्व पद से हटा दिया था. उनकी वापसी ऐसे समय में हुई है जब उनकी पार्टी में संभावित फूट पड़ सकती है, और उनका गुट शुक्रवार को काठमांडू में कैडर की एक राष्ट्रीय सभा करने की घोषणा कर चुका है.

विशेष आम अधिवेशन को मान्यता

पार्टी के पूर्व महासचिव शशांक कोइराला अलग बैठक करने की कोशिशों में जुटे हैं. इस गुट को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट विशेष आम अधिवेशन को अमान्य कर देगा. उस अधिवेशन में गगन थापा को पार्टी की नई केंद्रीय समिति का अध्यक्ष चुना गया था. हालांकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने विशेष आम अधिवेशन को मान्यता दे दी थी, जिससे इस पुरानी पार्टी को थापा के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की अनुमति मिल गई थी. देउबा 25 फरवरी को देश छोड़कर सिंगापुर चले गए थे. वो मेडिकल चेक-अप के लिए गए थे और महीनों तक विदेश में रहे.

घर पर प्रदर्शनकारियों ने किया था हमला 

क्योंकि, पिछले साल सितंबर में जेन-जी आंदोलन के दौरान उनके घर पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया था. इस दौरान भारी मात्रा में कैश जलाया गया था. इसके बाद से ही उन पर मनी-लॉन्ड्रिंग के आरोप में जांच रही है. नेपाली अधिकारियों ने चल रही जांच के तहत पहले ही उनके एसेट्स और बैंक अकाउंट्स फ्रीज कर दिए हैं. प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के कुछ दिनों बाद, मनी लॉन्ड्रिंग इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के अनुरोध पर देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किए गए थे.

रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की नाकाम कोशिश

नेपाली सरकार ने इंटरपोल के जरिए उनके नाम पर रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की नाकाम कोशिश की थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 25 मई को गिरफ्तारी वारंट रद्द कर दिया था. शायद देउबा ने घर लौटने का फैसला किया. इसके बाद 5 मार्च के चुनावों में पार्टी को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा, जिससे देउबा गुट ने थापा के नेतृत्व की कड़ी आलोचना की थी. इस गुट ने सुप्रीम कोर्ट के 17 अप्रैल के फैसले की समीक्षा की अपील की थी। पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने रिव्यू पिटीशन को मंजूरी दे दी, और केस को तीन जजों की बेंच के सामने नई सुनवाई के लिए वापस भेज दिया.

पार्टी का भविष्य तय करेगा नई सुनवाई 

नई सुनवाई का नतीजा ही पार्टी का भविष्य तय करेगा. हालांकि उनकी वापसी से उनके गुट में जोश आ सकता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार उनके और उनकी पत्नी, पूर्व विदेश मंत्री आरजू देउबा, जो उनके साथ विदेश गई थीं, के खिलाफ कैसा बर्ताव करेगी. उनकी पत्नी और बेटा, जयबीर स्वदेश नहीं लौटे हैं. देउबा और उनकी पत्नी, जिन्हें पिछले साल जेन-जी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बुरी तरह पीटा था, मेडिकल इलाज का हवाला देकर देश छोड़कर चले गए थे लेकिन उनके इतने लंबे समय तक विदेश में रहने का कारण साफ नहीं हुआ.

नहीं माना कि वो हांगकांग में थे

इस जोड़े ने विदेश में अपनी यात्राओं की जानकारी सार्वजनिक रूप से नहीं दी है, न ही उन्होंने यह बताया है कि पूर्व प्रधानमंत्री किन बीमारियों का इलाज करा रहे थे. इस दौरान, माना जाता है कि वे सिंगापुर से हांगकांग चले गए थे. देउबा परिवार के हांगकांग में घूमते हुए वीडियो समय-समय पर सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, हालांकि जोड़े ने कभी भी ये साफतौर पर नहीं माना कि वो हांगकांग में थे.

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