चंडीगढ़ में मंत्री के आवास के बाहर शिक्षकों का प्रदर्शन, पुलिस पर जबरन हिरासत में लेकर हटाने का आरोप

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Punjab: चंडीगढ़ में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सरकारी आवास के बाहर अपनी मांगों को लेकर धरना देने पहुंचे 180 ETT शिक्षकों को पुलिस ने जबरन वहां से हटाया और हिरासत में ले लिया. सेक्टर-2 में शिक्षक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जुटे थे. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से भर्ती से जुड़े विवाद में न्याय की मांग कर रहे हैं. मामला क्लर्क पद पर हुई नियुक्तियों में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है. शिक्षकों का आरोप है कि इस मामले में जिन लोगों की भूमिका सामने आई, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

मंत्री के घर के बाहर पहुंचे

इसी मांग को लेकर वे सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए मंत्री के घर के बाहर पहुंचे थे. इस दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी शिक्षकों ने नाराजगी जताई. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी तरह की हिंसा या हंगामा करने नहीं आए थे. उनका आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें वहां से उठाया और हिरासत में ले लिया. शिक्षकों के मुताबिक, 2021 में क्लर्कों की नियुक्ति को लेकर विभागीय जांच की बात सामने आई थी.

मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई

अब 180 ETT शिक्षक इसी मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और अपनी स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि क्लर्क विभाग में नियुक्तियों को लेकर सामने आई कथित गड़बड़ी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा. उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितता के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए. शिक्षकों की मांग है कि जिन लोगों पर गड़बड़ी का आरोप है, उन्हें निलंबित किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो.

खामियों का हवाला देकर बर्खास्त करने का आरोप

प्रदर्शनकारी शिक्षकों में से एक ने कहा कि हमारी भर्ती मूल रूप से 2016 में हुई थी, लेकिन बाद में भर्ती प्रक्रिया में खामियों का हवाला देकर हमें बर्खास्त कर दिया गया. इसके बाद कोर्ट के आदेश के बाद हमें दोबारा बहाल किया गया. हालांकि, आम आदमी पार्टी की सरकार ने एक विभागीय क्लर्क के साथ मिलीभगत कर उस क्लर्क को बचाते हुए हमें बहाल किया.

क्लर्क की गलती के कारण हुई समस्या 

प्रदर्शनकारी शिक्षक ने आगे कहा कि अब एक IAS रिपोर्ट में कहा गया है कि यह समस्या क्लर्क की गलती के कारण हुई और हम 180 ETT शिक्षक इसके लिए जिम्मेदार नहीं थे. इसके बावजूद कई बैठकों के बाद भी हमें न्याय नहीं मिला. पिछले एक सप्ताह से हम लगातार बैठकें कर रहे हैं, लेकिन हमारी मांगों पर कोई समाधान नहीं हुआ. शिक्षकों का कहना है कि वे इसी मामले में न्याय की मांग को लेकर चंडीगढ़ पहुंचे थे.

पुलिस कार्रवाई का सामना

उनका आरोप है कि अपनी बात रखने के बजाय उन्हें पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे थे और सरकार से मामले में स्पष्ट कार्रवाई की उम्मीद कर रहे थे. अब उनका सवाल है कि अगर जांच में शिक्षक दोषी नहीं पाए गए हैं तो फिर उन्हें लंबे समय तक परेशानी क्यों झेलनी पड़ी.

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