Dhaka: बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के बीच डर, धमकी और असुरक्षा का माहौल बढ़ता जा रहा है. बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट की चर्चित वकील और हिंदू अधिकार कार्यकर्ता चैताली चक्रवर्ती ने कहा है कि लगातार हिंसा और संस्थागत कमजोरी के कारण बड़ी संख्या में बांग्लादेश हिंदू-विहीन हो जाएगा. यह बयान बांग्लादेश में सांप्रदायिक हिंसा, अल्पसंख्यकों पर हमलों और कानून-व्यवस्था को लेकर चल रही अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बीच आया है.
बांग्लादेश के माहौल पर गंभीर बात बताई
30 अगस्त को बांग्लादेश के न्यूज़ पोर्टल “Weekly Blitz” में छपे इंटरव्यू में चैताली चक्रवर्ती ने संपादक सलाह उद्दीन शोएब चौधरी को बांग्लादेश के माहौल पर ये गंभीर बात बताई. चैताली चक्रवर्ती ने कहा कि असुरक्षा सिर्फ हिंदू समुदाय तक सीमित नहीं है. देश के आम नागरिक भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. हालांकि, हिंदुओं के सामने उनकी धार्मिक पहचान के कारण अतिरिक्त परेशानी है.
खुलकर बात नहीं कर रहे स्थानीय लोग
रंगपुर में एक हिंदू परिवार के 4 सदस्यों की हत्या का मामला भी सामने आया. चैताली चक्रवर्ती ने बताया कि वह मानवाधिकार से जुड़े अपने काम के तहत इस मामले की जांच कर रही थीं. उन्होंने कहा कि डर के कारण स्थानीय लोग घटना के बारे में खुलकर बात नहीं कर रहे हैं. उनके मुताबिक, इलाके के लोग बदले की कार्रवाई के डर से जानकारी देने से बच रहे हैं. उन्होंने कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए इसकी पूरी और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.
प्रेरित लोगों की भूमिका थी या नहीं
चैताली चक्रवर्ती ने यह भी कहा कि घटना जिस तरह हुई, उससे यह पता लगाना जरूरी है कि इसमें किसी संगठित या वैचारिक रूप से प्रेरित लोगों की भूमिका थी या नहीं. इन बातों की स्वतंत्र जांच के जरिए पुष्टि होना बाकी है. चैताली चक्रवर्ती ने बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था और सरकारी संस्थाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर पुलिस प्रशासन खुद कमजोर स्थिति में है तो वह आम नागरिकों को प्रभावी सुरक्षा नहीं दे सकता.
सभी समस्याएं हल हो गई होतीं
उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन मजबूत होता, तो सभी समस्याएं हल हो गई होतीं. ‘एक दशक में बांग्लादेश में हिंदू नहीं बचेंगे?’ चैताली चक्रवर्ती ने हिंदू आबादी को लेकर सबसे गंभीर चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर हिंसा, डर और भेदभाव को नहीं रोका गया तो आने वाले समय में बांग्लादेश की हिंदू आबादी में बड़ी गिरावट आ सकती है. उनके मुताबिक, लगातार असुरक्षा के कारण लोगों के सामने अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़ने या असुरक्षित माहौल में रहने के बीच चुनाव की स्थिति पैदा हो सकती है.
हिंदू बांग्लादेश छोड़ना नहीं चाहते
उन्होंने कहा कि अगर मौजूदा स्थिति जारी रही तो एक दशक के भीतर बांग्लादेश लगभग हिंदू-विहीन हो सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि हिंदू बांग्लादेश छोड़ना नहीं चाहते, उन्होंने कहा कि यह उनका मातृभूमि है और उनके पिता, दादा और परिवार के कई सदस्य इसी देश में पैदा हुए हैं. उनका कहना है कि जरूरत हिंदुओं के पलायन की नहीं, बल्कि बराबरी के अधिकार और सुरक्षा की है.
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