New Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 यूक्रेनी नागरिकों की याचिका खारिज कर दी. इन आरोपियों ने जेल में रहते हुए अपने परिवार के सदस्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुलाकात करने की परमिशन मांगी थी. इन्हें जेल से परमिशन नहीं, मिली तो दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया. 26 दिसंबर 2022 के उस सर्कुलर को चैलेंज किया, जिसमें विदेशी नागरिकों को ई-मुलाकात (वीडियो कॉन्फ्रेंस या कॉल) के जरिए अपने परिवार के सदस्यों से बातचीत करने की इजाजत नहीं देता है. इसे आर्टिकल 14 और 21 का उल्लंघन बताया.
मानसिक स्वास्थ्य का उल्लंघन
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कैदी को परिवार के सदस्यों से मिलने की इजाज़त न देना उनकी गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य का उल्लंघन है और उन्हें समाज से जुड़े रहने से रोकता है. जस्टिस नवीन चावला की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका खारिज की और अब 21 सितंबर को इस मामले पर सुनवाई होगी. इससे पहले हाईकोर्ट ने एक और याचिका खारिज की थी जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने इन विदेशी नागरिकों के खिलाफ जांच का समय 90 से बढ़ाकर 180 दिन कर दिया था.
मिजोरम के संरक्षित इलाकों में जाने का आरोप
इन विदेशी नागरिकों पर म्यांमार में गैर-कानूनी तरीके से घुसने और उसके बाद जातीय समूहों से संपर्क बनाने के लिए मिजोरम के संरक्षित इलाकों में जाने का आरोप है. आरोपियों पर गैर-कानूनी हथियार सप्लाई करने, जातीय समूहों को ट्रेनिंग देने और ड्रोन चलाने में उनकी मदद करने के आरोप हैं. यह मामला आज से 7 महीने पहले शुरू हुआ. जब 13 मार्च को भारतीय पुलिस ने देश के तीन अलग-अलग एयरपोर्ट से 6 यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया.
दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार
तीन को लखनऊ और तीन को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया. जबकि 1 अमेरिकी नागरिक को ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने कोलकाता से गिरफ्तार किया गया. हालांकि यह क्लियर नहीं हो पाया था कि वो म्यांमार से आ रहे थे या जा रहे थे. 16 मार्च को इन आरोपियों को पाटियाला हाउल कोर्ट की स्पेशल एनआई कोर्ट में पेश किया गया. उन पर Anti Terror Law और UAPA की कई धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई. कोर्ट ने 11 दिन की कस्टडी दी. इसके बाद यह समय पहले तीन महीने और 6 महीने के लिए बढ़ गया.
जातीय उग्रवादी समूहों से किया संपर्क
NIA के मुताबिक, ये लोग वीजा पर भारत आए और मिजोरम के संरक्षित इलाके में दाखिल हुए. इसके बाद, वे म्यांमार चले गए और जातीय उग्रवादी समूहों से संपर्क किया. NIA का कहना है कि इन विदेशी नागरिकों ने म्यांमार में ट्रेनिंग ली थी और बदले में वे जातीय उग्रवादी समूहों को ट्रेनिंग दे रहे थे. ये समूह भारत में सक्रिय विद्रोही गुटों से जुड़े हैं. यह भी आरोप है कि वे यूरोप से ड्रोन की एक बड़ी खेप लाए थे.
इसे भी पढ़ें. मेलोनी ने रचा इतिहास, इटली की सबसे लंबे समय तक पीएम रहने वाली बनीं नेता, PM Modi ने दी बधाई

