FPI Selling: विदेशी निवेशकों ने सितंबर में शेयर बाजार से निकाले 14,474 करोड़ रुपये, Nifty 50 में लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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FPI Selling: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव सितंबर महीने में फिर देखने को मिल रहा है. 1 से 12 सितंबर के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने इक्विटी मार्केट से 14,474 करोड़ रुपये की निकासी की है. इससे पहले जुलाई और अगस्त में विदेशी निवेशकों की ओर से सकारात्मक इनफ्लो दर्ज किया गया था. वहीं, प्राइमरी मार्केट यानी IPO में FPI का निवेश अभी भी सकारात्मक बना हुआ है. सितंबर में अब तक प्राइमरी मार्केट में विदेशी निवेशकों ने 1,336 करोड़ रुपये का निवेश किया है. इसके साथ ही इस साल अब तक प्राइमरी मार्केट में FPI निवेश बढ़कर 47,183 करोड़ रुपये हो गया है.

लगातार पांचवें हफ्ते गिरा Nifty 50

इस बीच भारतीय इक्विटी बाजार के लिए पिछला सप्ताह भी दबाव वाला रहा. Nifty 50 में लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट दर्ज की गई. पूरे सप्ताह बाजार पर बिकवाली का असर देखने को मिला और प्रमुख सेक्टर भी गिरावट के साथ बंद हुए. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. इसके कारण महंगाई, ग्लोबल ब्याज दरों और आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं. इन परिस्थितियों के बीच बाजार में बड़े पैमाने पर बिकवाली देखने को मिली.

कच्चे तेल की कीमतें बनी बड़ी चुनौती

मार्केट के जानकारों के मुताबिक घरेलू इक्विटी के लिए कच्चे तेल की कीमतें एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई हैं. विदेशी संस्थागत निवेशक भी सतर्क बने हुए हैं और उनकी लगातार बिकवाली घरेलू इक्विटी बाजार के लिए बड़ी बाधा साबित हो रही है. दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने पिछले सप्ताह 6,419.46 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की. DII की इस खरीदारी से विदेशी निवेशकों की बिकवाली के असर को कम करने और घरेलू इक्विटी बाजार में और गिरावट को रोकने में मदद मिली.

ईरान-अमेरिका तनाव पर रहेगी नजर

आगे चलकर FPI निवेश का रुख ईरान-अमेरिका के बीच तनाव और उससे कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर से काफी हद तक प्रभावित हो सकता है. जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के साथ बढ़ती महंगाई का मतलब मॉनेटरी पॉलिसी के सख्त होने की संभावना है. इसका असर बॉन्ड यील्ड पर भी पड़ सकता है.

अगले हफ्ते भी बाजार में उतार-चढ़ाव के आसार

आने वाले सप्ताह में ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक और जियो-पॉलिटिकल जोखिमों के कारण भारतीय इक्विटी बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है. बाजार की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमतें, मध्य पूर्व के घटनाक्रम और अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बदलती उम्मीदें अहम भूमिका निभा सकती हैं.

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