BRICS Summit 2026: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था, निवेश, व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. शनिवार को विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने बदलती वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका पर अपने विचार रखे. वक्ताओं ने कहा कि ब्रिक्स देशों की मजबूत होती आर्थिक क्षमता आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती है.
चर्चा के दौरान निष्पक्ष वैश्विक व्यापार, विकासशील देशों में निवेश और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया. विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है.
अजय दुआ ने पीएम मोदी की टिप्पणी का किया समर्थन
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के पूर्व सचिव अजय दुआ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस टिप्पणी का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने ब्रिक्स देशों की आर्थिक प्रगति का उल्लेख किया था. अजय दुआ ने कहा कि पिछले लगभग एक दशक में वैश्विक अर्थव्यवस्था की औसत वृद्धि दर करीब 3.5 प्रतिशत सालाना रही है.
इसके मुकाबले ब्रिक्स देशों, विशेष रूप से भारत की आर्थिक वृद्धि दर काफी अधिक रही है. उन्होंने कहा कि चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था का भी 5.5 से 6 प्रतिशत के आसपास की दर से बढ़ना वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर बड़ा प्रभाव डालता है. उनके मुताबिक यही वजह है कि ब्रिक्स देश अब वैश्विक विकास के प्रमुख इंजनों के रूप में उभर रहे हैं.
ब्रिक्स की संयुक्त अर्थव्यवस्था करीब 33 ट्रिलियन डॉलर
एसडब्ल्यूएफआई के चेयरमैन और आईब्रिक्स 2026 के लीड को-चेयर लक्ष्मी नारायणन ने आईएएनएस से बातचीत में ब्रिक्स की आर्थिक ताकत का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार करीब 33 ट्रिलियन डॉलर है, जो वैश्विक जीडीपी का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा है. लक्ष्मी नारायणन के अनुसार, अगर क्रय शक्ति समता यानी PPP के आधार पर देखा जाए, तो ब्रिक्स और सहयोगी देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था लगभग 82 ट्रिलियन डॉलर की है. यह जी-20 समूह की लगभग 62 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से काफी बड़ी है. उन्होंने कहा कि ये आंकड़े संकेत देते हैं कि वैश्विक आर्थिक संतुलन धीरे-धीरे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ओर स्थानांतरित हो रहा है.
व्यापार और वाणिज्य बना प्रमुख फोकस
लक्ष्मी नारायणन ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में व्यापार और वाणिज्य ब्रिक्स देशों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल हैं. वैश्विक व्यापार से जुड़ी चुनौतियों का असर लगभग सभी सदस्य देशों पर पड़ा है. ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार को बढ़ाना इस शिखर सम्मेलन का प्रमुख फोकस रहने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि मजबूत आपसी व्यापार से सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और बढ़ाया जा सकता है.
आईब्रिक्स का 1 ट्रिलियन डॉलर निवेश का लक्ष्य
लक्ष्मी नारायणन ने यह भी बताया कि आईब्रिक्स का लक्ष्य ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं में 1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित करना है. उनके मुताबिक यह निवेश विकासशील क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, उद्योग, तकनीक और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने में मदद कर सकता है. इससे ब्रिक्स देश सामूहिक आर्थिक शक्ति के रूप में और मजबूत हो सकते हैं.
यूएन ने बहुपक्षवाद को बताया जरूरी
इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मौजूदा समय में बहुपक्षवाद पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रीय समूहों और देशों के बीच सकारात्मक समझौते और सहयोग वैश्विक तनाव को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है. दुजारिक के मुताबिक ब्रिक्स दुनिया की बड़ी आबादी और वैश्विक आर्थिक उत्पादन के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे में वैश्विक स्थिरता, आर्थिक सहयोग और साझा विकास को बढ़ावा देने में इस मंच की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है.
ग्लोबल साउथ के हितों के लिए वित्तीय संस्थानों में सुधार की जरूरत
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने कहा कि वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के देशों के हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार आवश्यक है. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को अधिक संतुलित और समावेशी बनाने की जरूरत है, ताकि इसका लाभ किसी एक समूह या कुछ देशों तक सीमित न रहे. दुजारिक ने वैश्विक व्यापार प्रणाली को अधिक निष्पक्ष बनाने और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और व्यापारिक ढांचे में संतुलित सुधार होने पर विकासशील अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक विकास में अधिक प्रभावी तरीके से योगदान दे सकेंगी.
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