BRICS Summit 2026: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल नवाचार और तकनीकी साझेदारी को लेकर अहम चर्चा हुई. देश-दुनिया से सम्मेलन में पहुंचे विशेषज्ञों ने भारत की तेजी से बढ़ती तकनीकी क्षमता की तारीफ की और कहा कि भारत वैश्विक AI केंद्र के रूप में तेजी से अपनी जगह बना रहा है. विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि भारत का डिजिटल भुगतान मॉडल, खासकर UPI, आज दुनिया के सामने एक प्रभावी उदाहरण बन चुका है. शनिवार को हुई चर्चा में भारत और अन्य ब्रिक्स देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने, AI के इस्तेमाल और डिजिटल भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI और डिजिटल तकनीक न सिर्फ आर्थिक विकास को गति देंगी, बल्कि रोजगार और काम करने के तरीकों में भी बड़े बदलाव ला सकती हैं.
भारत और मिस्र के बीच AI सहयोग की बड़ी संभावनाएं
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में मिस्र के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्सपर्ट अहमद गमाल ने कहा कि ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच तकनीकी सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण मंच बन सकता है. उन्होंने कहा कि उनके नजरिए से यह सम्मेलन खास तौर पर भारत और मिस्र के बीच AI के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत शुरुआत है. उनके मुताबिक भारत तेजी से वैश्विक AI केंद्र के रूप में उभर रहा है और दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी की संभावनाएं काफी व्यापक हैं. अहमद गमाल ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच होने वाला इस तरह का संवाद भविष्य में संयुक्त परियोजनाओं और ज्ञान साझा करने के लिए मजबूत आधार तैयार कर सकता है.
जनरेटिव AI के बाद अब एजेंटिक AI का दौर
अहमद गमाल ने AI के बढ़ते प्रभाव को लेकर कहा कि आने वाले वर्षों में इस तकनीक से रोजगार और कार्य संस्कृति में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. उनके अनुसार दुनिया अब सिर्फ जनरेटिव AI तक सीमित नहीं है, बल्कि एजेंटिक AI के दौर में आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि AI बहुत सारी नौकरियों की प्रकृति और काम करने की प्रक्रिया को बदल देगा. यदि सरकारें और उद्योग इन तकनीकों का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करते हैं, तो उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है. उनके मुताबिक AI के क्षेत्र में हो रहे बदलावों को देखते हुए ब्रिक्स देशों के लिए एक-दूसरे के अनुभवों से सीखना और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना जरूरी है. इससे AI और नवाचार से मिलने वाले फायदे को पूरे ब्रिक्स समुदाय तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है.
तकनीकी सहयोग के लिए BRICS महत्वपूर्ण मंच
अहमद गमाल ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाने वाला प्रभावी मंच बताया. उन्होंने कहा कि यह मंच सदस्य देशों के नेताओं और विशेषज्ञों को संवाद का अवसर देता है, जिससे नवाचार, तकनीकी विकास और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिल सकती है. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया AI के प्रभाव से तेजी से बदल रही है. ऐसे में ब्रिक्स देशों को साथ मिलकर तकनीकी क्षमताओं को आगे बढ़ाने और एक-दूसरे के अनुभवों का लाभ उठाने पर ध्यान देना चाहिए.
BRICS Pay से जुड़ेंगी अलग-अलग देशों की भुगतान प्रणालियां
तकनीक के साथ-साथ सम्मेलन में डिजिटल भुगतान को लेकर भी चर्चा हुई. ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के प्रमुख आंद्रे मिखायलिशिन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि BRICS Pay का उद्देश्य सदस्य देशों की राष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ना है. उन्होंने कहा कि BRICS Pay अलग-अलग देशों की भुगतान प्रणालियों के बीच एक पुल की तरह काम कर सकता है. इससे यात्रियों और कंपनियों को अपने देश की भुगतान व्यवस्था का इस्तेमाल करते हुए दूसरे सदस्य देशों में लेनदेन करने की सुविधा मिल सकती है. उनके मुताबिक यह ढांचा ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और वित्तीय संपर्क को अधिक आसान बनाने में मदद कर सकता है.
रूस के साथ भारत का सहयोग महत्वपूर्ण: डॉ. पवन जोश
ब्रिक्स पे इंडिया के प्रमुख डॉ. पवन जोश ने भारत और रूस के संबंधों को ऐतिहासिक और भरोसे पर आधारित बताया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है. रक्षा क्षेत्र का जिक्र करते हुए डॉ. जोश ने कहा कि रूस के साथ भारत का संबंध बेहद विशेष और ऐतिहासिक है. उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में रूस महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है.
UPI को बताया भारत की डिजिटल ताकत का उदाहरण
डॉ. पवन जोश ने कहा कि भारत ने विदेशी तकनीकों को समझकर उन्हें अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकसित किया है. उन्होंने इसके सबसे बड़े उदाहरण के तौर पर UPI का उल्लेख किया. उनके मुताबिक भारत का डिजिटल भुगतान मॉडल आज पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुका है. उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में भारत ने जिस तरह अपनी व्यवस्था को विकसित किया है, उससे दूसरे देशों के लिए भी सीखने की संभावनाएं मौजूद हैं.
पीएम मोदी के ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ विजन का किया जिक्र
डॉ. पवन जोश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का दृष्टिकोण और ब्रिक्स का मूल उद्देश्य काफी हद तक एक-दूसरे से मेल खाते हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का विजन पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने का है और ब्रिक्स का दर्शन भी सहयोग, साझेदारी और साझा विकास पर आधारित है. उनके अनुसार ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व करने वाला यह मंच सदस्य देशों को मिलकर आगे बढ़ने का अवसर देता है. उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान आगे बढ़ाई गई चर्चाओं और समझौतों का उद्देश्य भी यही है कि ब्रिक्स देश सहयोग, साझेदारी और साझा विकास के जरिए सामूहिक रूप से आगे बढ़ें.
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