Semiconductor Ecosystem: भारत अब सिर्फ सेमीकंडक्टर चिप खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि इसके निर्माण और डिजाइन से लेकर पैकेजिंग और टेस्टिंग तक पूरी व्यवस्था देश में खड़ी करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. सरकार का लक्ष्य ऐसी मजबूत व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों के साथ उन्हें डिजाइन करने वाले इंजीनियर, जरूरी मशीनें, कच्चा माल, पैकेजिंग और आपूर्ति श्रृंखला भी देश में विकसित हो. सेमीकॉन इंडिया 2026 से पहले सरकार की ओर से जारी फैक्टशीट में इस क्षेत्र में अब तक हुई प्रगति की जानकारी सामने आई है. पीएम मोदी 17 सितंबर को द्वारका स्थित यशोभूमि में तीन दिवसीय सेमीकॉन इंडिया 2026 कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे. इस आयोजन में दुनिया की बड़ी चिप कंपनियों के प्रतिनिधियों के अलावा निवेशक और नीति-निर्माता भी शामिल होंगे. इस साल कार्यक्रम की थीम “सिलिकॉन से सिस्टम तक: पूरा इकोसिस्टम बनाना” रखी गई है.
76 हजार करोड़ से शुरू हुई थी बड़ी पहल
भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को गति देने के लिए वर्ष 2021 में सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी. सरकार की योजना शुरुआत से ही सिर्फ एक बड़ी फैक्ट्री लगाने की नहीं थी. इसके तहत चिप उद्योग की पूरी मूल्य श्रृंखला तैयार करने पर जोर दिया गया. पहले चरण यानी सेमीकॉन 1.0 के लिए सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया. इस राशि के जरिए चिप डिजाइन और निर्माण के अलावा पैकेजिंग, परीक्षण, जरूरी उपकरण, कच्चे माल और प्रशिक्षित मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई.
सेमीकॉन 2.0 में 1.27 लाख करोड़ का दांव
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आगे की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने जुलाई 2026 में सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी. इस दूसरे चरण के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इस योजना के तहत छह क्षेत्रों को प्रमुखता दी गई है. इनमें चिप डिजाइन, निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और सामग्री, चिप निर्माण संयंत्र, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास और कुशल प्रतिभाओं को तैयार करना शामिल है.
छह राज्यों में शुरू हुईं 12 परियोजनाएं
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अब योजनाओं का असर जमीन पर भी नजर आने लगा है. छह राज्यों में 12 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है और इनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता है. इन परियोजनाओं में सिलिकॉन और कंपाउंड सेमीकंडक्टर निर्माण, डिस्प्ले बनाने तथा आधुनिक पैकेजिंग से जुड़ी इकाइयां शामिल हैं. इनमें से तीन संयंत्रों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू भी हो चुका है. यानी भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को लेकर जो तैयारी कुछ साल पहले शुरू हुई थी, वह अब उत्पादन के स्तर तक पहुंच रही है.
चिप डिजाइन में भी बढ़ रही देश की ताकत
भारत का जोर केवल फैक्ट्री लगाने पर नहीं है. देश में चिप डिजाइन की क्षमता बढ़ाने के लिए छात्रों, इंजीनियरों और स्टार्टअप को आधुनिक तकनीकी सुविधाएं दी जा रही हैं. ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ कार्यक्रम के तहत इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन यानी ईडीए से जुड़े सॉफ्टवेयर और उपकरण 320 शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाए जा चुके हैं. इसके जरिए अब तक 68,000 से ज्यादा छात्रों को प्रशिक्षण मिला है. इसके अलावा 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को आर्थिक सहायता के लिए मंजूरी दी गई है. डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना के तहत 105 स्टार्टअप और छोटे-मझोले उद्यमों को भी ईडीए उपकरणों के लिए सहायता उपलब्ध कराई गई है.
211 चिप डिजाइन ‘टेप-आउट’ तक पहुंचे
सरकार की फैक्टशीट के मुताबिक, अप्रैल 2026 तक 75 संस्थानों ने 211 चिप डिजाइन तैयार कर लिए थे और ये डिजाइन उत्पादन से पहले के अहम चरण ‘टेप-आउट’ तक पहुंच चुके थे. यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि भारत में चिप डिजाइन का काम अब कुछ गिने-चुने संस्थानों तक सीमित नहीं रह गया है. अलग-अलग संस्थानों में भी इस क्षेत्र की क्षमता विकसित की जा रही है.
1 लाख से ज्यादा इंजीनियरों ने उठाया फायदा
देश में चिप डिजाइन से जुड़ी सुविधाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए चिपइन सेंटर बनाया गया है. यह एक साझा राष्ट्रीय सुविधा के रूप में काम करता है, जहां इंजीनियरों और संस्थानों को आधुनिक डिजाइन उपकरण, चिप निर्माण से जुड़ी सेवाएं और विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है. चिप्स टू स्टार्टअप और डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजनाओं के तहत विकसित इस सुविधा का लाभ अब तक 500 से अधिक संस्थानों के 1 लाख से ज्यादा इंजीनियर उठा चुके हैं. इनमें 400 शैक्षणिक संस्थान और 100 स्टार्टअप शामिल हैं. इन संस्थानों ने मिलकर 300 से ज्यादा चिप डिजाइन तैयार किए हैं. इन डिजाइन किए गए चिप्स को निर्माण के अगले चरण के लिए मोहाली स्थित एससीएल और विदेशों की आधुनिक चिप फैक्ट्रियों में भेजा गया है. भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति में अब निर्माण के साथ डिजाइन, प्रतिभा, तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला को एक साथ मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है.
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