Housing Price Index: भारत के आवासीय बाजार में घरों की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है. देश का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (HPI) वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान सालाना आधार पर 3.6% बढ़ा है. यह वृद्धि पिछले साल की इसी अवधि के बराबर रही है. वहीं, वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में HPI की सालाना वृद्धि दर 4.5% रही थी. यह आंकड़ा देश के आवासीय बाजार में बनी स्थिरता को दर्शाता है. बुधवार को जारी बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के मुताबिक, तिमाही आधार पर HPI वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 1.1% बढ़ा है. यह वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में दर्ज 0.5% की वृद्धि से अधिक है. इसी अवधि में हाउसिंग क्रेडिट की वृद्धि दर 11 प्रतिशत रही.
निर्माण लागत बढ़ने से घरों की कीमतों पर असर
रिपोर्ट के अनुसार, आवास क्षेत्र में महंगाई पर बढ़ती इनपुट लागत का असर देखने को मिला है. वैश्विक कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी और निर्माण लागत बढ़ने से घरों की कीमतों पर भी दबाव पड़ा. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर भी पड़ा है. संघर्ष के कारण कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई और सप्लाई चेन में रुकावट आई. भारत में भी Fy27 की पहली तिमाही के दौरान महंगाई में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसका प्रभाव अलग-अलग उद्योगों पर देखने को मिला.
चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा बढ़ीं घरों की कीमतें
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में HPI की सालाना वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान देने वाले शहरों में चंडीगढ़ सबसे आगे रहा. यहां घरों की कीमतों में 49.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसके बाद जयपुर में 36.4 प्रतिशत, कानपुर में 27.5 प्रतिशत, लखनऊ में 17.7 प्रतिशत और तिरुवनंतपुरम में 16.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. चंडीगढ़ में कीमतों में तेज बढ़ोतरी की एक वजह कलेक्टर रेट में हालिया बदलाव बताया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ. इसके अलावा नई जमीन की उपलब्धता कम होने का असर भी हाल के समय में कीमतों पर पड़ा है.
इन बड़े शहरों में सुस्त रही कीमतों की रफ्तार
दूसरी ओर, कुछ बड़े शहरों में घरों की कीमतों में गिरावट या बेहद धीमी बढ़ोतरी देखने को मिली. वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के दौरान दिल्ली में 1.2 प्रतिशत की गिरावट, कोलकाता में 31.5 प्रतिशत की गिरावट और हैदराबाद में 0.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, मुंबई में घरों की कीमतों में 2.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.
टियर-2 शहर बढ़ा रहे हैं आवास बाजार की मांग
रिपोर्ट के मुताबिक, बेहतर कनेक्टिविटी और सर्विस सेक्टर में रोजगार के बढ़ते अवसरों के कारण बड़े शहरों की तुलना में टियर-2 शहर आवास बाजार की मांग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. बेहतर सुविधाओं और रोजगार के अवसरों के साथ इन शहरों में आवासीय बाजार की गतिविधियां बढ़ रही हैं.
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