India-China relations: भारत से लौटते ही नरम पड़े चीनी राष्‍ट्रपत‍ि ज‍िनपिंग, ट्रेड की राह में आ रहे रोड़े होंगे खत्‍म

Must Read

New Delhi: चीनी राष्‍ट्रपत‍ि शी ज‍िनपिंग के भारत से लौटते ही दोनों देशों ने ट्रेड की राह में आने वाली सारी द‍िक्‍कतों को तुरंत पहचानने और उन्‍हें खत्‍म करने का फैसला ल‍िया है. भारत चीन से अरबों डॉलर का सामान खरीदता है, जबकि चीन को भारत का एक्‍सपोर्ट काफी कम है. भारत चाहता है क‍ि चीन अपने मार्केट हमारे ल‍िए खोले. दोनों ओर से जो संकेत म‍िले हैं, उससे ऐसा होता नजर आ रहा है. ऐसा नहीं है क‍ि भारत-चीन के बीच ट्रेड को लेकर सभी द‍िक्‍कतें खत्‍म हो गई हैं. लेकिन इस बार चीन का रुख थोड़ा बदलता हुआ द‍िख रहा है.

भारत भी पूरी तरह तैयार

वह लचीला हुआ है. हठ खत्‍म होती नजर आ रही है. भारत भी पूरी तरह तैयार है. अब चर्चा सिर्फ इस बात पर नहीं होगी कि भारत चीन से कितना सामान खरीदता है. बातचीत इस पर भी होगी कि भारतीय कंपनियों को चीन के बाजार में कितनी जगह मिलती है. यानी भारत की कोशिश है कि चीन से आयात बढ़ने के साथ-साथ भारत का निर्यात भी बढ़े. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ब्रिक्स समिट के दौरान हुई मुलाकात के बाद दोनों देशों ने आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है.

मोदी और जिनपिंग के बीच बनी सहमति को लागू करने पर जोर 

इसके बाद सोमवार को भारत के कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने अपने चीनी समकक्ष वांग वेन्ताओ से मुलाकात की. इस बैठक में दोनों देशों ने मोदी और जिनपिंग के बीच बनी सहमति को लागू करने पर जोर दिया. चीनी दूतावास के मुताबिक, भारत और चीन इस बात पर राजी हुए हैं कि दोनों देशों की आर्थिक और व्यापारिक चिंताओं का संतुलित तरीके से सही समाधान निकाला जाना चाहिए. दोनों देशों के नेताओं ने यह भी माना कि भारत और चीन को एक-दूसरे का साझेदार बनकर आगे बढ़ना चाहिए.

भारत का व्यापार घाटा 99.19 अरब डॉलर

भारत और चीन के बीच 2025-26 में कुल द्विपक्षीय व्यापार करीब 127.7 अरब डॉलर रहा. भारत का चीन को निर्यात बढ़कर करीब 19.47 अरब डॉलर हुआ, लेकिन चीन से आयात करीब 131.62 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इस तरह भारत का व्यापार घाटा लगभग 99.19 अरब डॉलर हो गया. यही वह आंकड़ा है जिसे भारत बदलना चाहता है. अगर दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच आसान होती है, तो भारत के कई सेक्टरों को फायदा मिल सकता है. सबसे बड़ा मौका फार्मा सेक्टर में है.

कम कीमत पर दवाइयां

भारत दुनिया में जेनेरिक दवाइयों का बड़ा उत्पादक है. भारतीय कंपनियां कम कीमत पर दवाइयां बनाती हैं, लेकिन चीन के बाजार में एंट्री के लिए मंजूरी और नियमों की कई बाधाएं हैं. अगर चीन भारतीय फिनिश्ड मेडिसिन, फॉर्मुलेशन और स्पेशियलिटी ड्रग्स के लिए रास्ता आसान करता है, तो भारतीय फार्मा कंपनियों का एक्सपोर्ट बढ़ सकता है. दूसरा बड़ा क्षेत्र है कृषि और फूड प्रोडक्ट्स. भारत चीन को चावल, मसाले, समुद्री खाद्य पदार्थ, प्रोसेस्ड फूड, चाय और दूसरे कृषि उत्पाद बेच सकता है.

फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के लिए बड़ा बाजार

चीन की बड़ी आबादी भारतीय किसानों और फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के लिए बड़ा बाजार बन सकती है. लेकिन इसके लिए सिर्फ बयान काफी नहीं होगा. चीन को आयात नियम, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और मंजूरी की प्रक्रिया आसान करनी होगी. तभी भारतीय उत्पाद बड़े पैमाने पर वहां पहुंच पाएंगे.

इसे भी पढ़ें. पाकिस्तानः इमरान की पार्टी PTI पर शिकंजा, केपी CM सहित 25 नेताओं के पासपोर्ट ब्लॉक

Latest News

इंटरनेशनल वाटर्स में पाकिस्तान नेवी ने की उकसावे वाली हरकत, भारत ने दी चेतावनी

International Waters Clash: इंटरनेशनल वाटर्स में पाकिस्तान नेवी ने बेहद खतरनाक और उकसावे वाली हरकत की है. दरअसल, पाकिस्तानी...

More Articles Like This