भारत की अर्थव्यवस्था FY26-27 में औसतन 7.3% की दर से बढ़ सकती है. डीबीएस बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राधिका राव ने मंगलवार को यह अनुमान जताया. उनके मुताबिक, मजबूत कैपिटल इनफ्लो से भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने की उम्मीद है. हालांकि, वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में विकास की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है. भारत की अर्थव्यवस्था ने FY27 की शुरुआत मजबूती के साथ की है. पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान देश की विकास दर सालाना आधार पर 7.8% दर्ज की गई. इस दौरान मजबूत घरेलू मांग, खपत, सरकारी पूंजीगत व्यय और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने आर्थिक गतिविधियों को गति देने में अहम भूमिका निभाई.
दूसरी छमाही में धीमी पड़ सकती है विकास दर
डीबीएस बैंक की अर्थशास्त्री राधिका राव के अनुसार, जीएसटी कलेक्शन, ई-वे बिल, बिजली की मांग और डिजिटल पेमेंट जैसे हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर मजबूत बने हुए हैं. ये संकेतक देश में आर्थिक गतिविधियों की मजबूती को दर्शाते हैं. हालांकि, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में विकास दर की रफ्तार कम होने की उम्मीद है. इसके पीछे मुश्किल वित्तीय परिस्थितियां, ऊर्जा की ऊंची कीमतें और पिछले साल का बड़ा आधार प्रमुख कारण हो सकते हैं. इन परिस्थितियों का असर अर्थव्यवस्था की वृद्धि पर पड़ने की आशंका है.
अगस्त में बढ़कर 4.8% हुई महंगाई दर
देश में महंगाई का दबाव भी बढ़ता दिखाई दे रहा है. अगस्त में महंगाई दर बढ़कर 4.8% हो गई. चीनी, दूध, प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों और खाने के तेल जैसी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ ऊर्जा और परिवहन लागत में इजाफे ने महंगाई को ऊपर धकेला है. इसके अलावा, औसत से कम मानसूनी बारिश और अल-नीनो का बढ़ता खतरा आने वाली फसल की पैदावार पर असर डाल सकता है. इससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है.
वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में 5% से ऊपर रह सकती है महंगाई
राधिका राव के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में हेडलाइन महंगाई दर 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रह सकती है. ऐसे में मौद्रिक नीति का मुख्य ध्यान महंगाई से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करने पर रहने की उम्मीद है. महंगाई में बढ़ोतरी, ऊर्जा की ऊंची कीमतें और खाद्य वस्तुओं की लागत में इजाफा नीति निर्धारण के लिहाज से अहम कारक बने रह सकते हैं.
विदेशी मुद्रा के बढ़ते प्रवाह से मजबूत हुआ बाहरी बफर
भारत में विदेशी मुद्रा के प्रवाह में तेजी आने से देश का बाहरी बफर मजबूत हुआ है. हालांकि, इसके साथ बैंकिंग प्रणाली में नकदी के प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ गई है. राधिका राव के अनुसार, आरबीआई की स्पेशल स्वैप विंडो के जरिए 143 अरब डॉलर जुटाए गए हैं. इसमें एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट के माध्यम से जुटाए गए 133 अरब डॉलर भी शामिल हैं. इसके परिणामस्वरूप भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 780 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है.
बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी सरप्लस लिक्विडिटी
विदेशी मुद्रा के बढ़ते प्रवाह के साथ बैंकिंग सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी भी तेजी से बढ़ी है. अर्थशास्त्री के मुताबिक, अतिरिक्त नकदी और यील्ड पर पड़ने वाले इसके असर को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है. इसके लिए वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) और ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) जैसे उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इन उपायों के जरिए बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी का प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है.
वित्त वर्ष 2027 में 1.1% रह सकता है करंट अकाउंट घाटा
डीबीएस बैंक को उम्मीद है कि FY26-27 में भारत का करंट अकाउंट घाटा (CAD) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 1.1 प्रतिशत रह सकता है. वहीं, बैंक का अनुमान है कि मजबूत कैपिटल इनफ्लो के कारण देश का बैलेंस ऑफ पेमेंट (BoP) अधिशेष में रह सकता है. इससे भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को समर्थन मिलने की उम्मीद है.
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