सरकार ने कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को पूरी क्षमता से चलाने का दिया निर्देश

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Power Supply: देश में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और आने वाले महीनों में बढ़ने वाली मांग को पूरा करने के लिए बिजली मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है. मंत्रालय ने बिजली अधिनियम की धारा 11 के तहत 50 मेगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अपनी उपलब्ध क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल करते हुए बिजली उत्पादन करने का निर्देश दिया है. सरकार का यह कदम खास तौर पर साल की आखिरी तिमाही में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए उठाया गया है.

मंत्रालय के मुताबिक, मौजूदा मांग और आपूर्ति की स्थिति के साथ आने वाले समय में बिजली की खपत बढ़ने की संभावना को देखते हुए देशभर में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. इसी क्रम में कैप्टिव बिजली संयंत्रों की उपलब्ध क्षमता का भी पूरा इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है.

क्या है बिजली अधिनियम की धारा 11?

बिजली अधिनियम की धारा 11 सरकार को असाधारण परिस्थितियों में बिजली उत्पादन कंपनियों को विशेष निर्देश देने का अधिकार देती है. इसके तहत सरकार बिजली उत्पादन कंपनियों को निर्धारित परिस्थितियों में अपने संयंत्रों का संचालन आधिकारिक निर्देशों के अनुसार करने के लिए कह सकती है.

इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए बिजली मंत्रालय ने पात्र कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अपनी उपलब्ध क्षमता के अनुसार ज्यादा से ज्यादा बिजली पैदा करने का निर्देश दिया है. इसका उद्देश्य देश की कुल बिजली उपलब्धता को बढ़ाना और मांग के समय आपूर्ति को मजबूत बनाए रखना है.

बची हुई बिजली पावर एक्सचेंज में बेचनी होगी

निर्देश के मुताबिक, कैप्टिव बिजली संयंत्र पहले अपनी जरूरत की बिजली पूरी करेंगे. इसके बाद जो बिजली अतिरिक्त बचेगी, उसे लागू नियमों और प्रक्रियाओं के तहत पावर एक्सचेंजों पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराना होगा. सरकार को उम्मीद है कि इससे बाजार में अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होगी और खासकर बिजली की अधिक मांग वाले समय में आपूर्ति को बनाए रखने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही अतिरिक्त कैप्टिव उत्पादन क्षमता को बिजली ग्रिड से जोड़ने में भी मदद मिलेगी.

1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक लागू रहेगा आदेश

बिजली मंत्रालय का यह निर्देश 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगा. इस दौरान बिजली उत्पादन कंपनियों को पर्याप्त कोयला भंडार बनाए रखने के लिए भी कहा गया है, ताकि ईंधन की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित न हो. मंत्रालय का मानना है कि पर्याप्त कोयला उपलब्ध रहने से बिजली संयंत्र लगातार अपनी क्षमता के अनुसार उत्पादन कर सकेंगे और बढ़ती मांग के दौरान बिजली आपूर्ति में किसी तरह की कमी की स्थिति को कम किया जा सकेगा.

हर सप्ताह देनी होगी उत्पादन की रिपोर्ट

बिजली उत्पादन की स्थिति पर नजर रखने के लिए मंत्रालय ने बिजली उत्पादकों को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण यानी सीईए को साप्ताहिक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. इन रिपोर्टों में बिजली उत्पादन, संयंत्र की कैप्टिव खपत, पावर एक्सचेंज या अन्य स्वीकृत माध्यमों के जरिए बेची गई बिजली, उपलब्ध उत्पादन क्षमता और कोयला भंडार की जानकारी शामिल होगी.

सरकार को उम्मीद है कि कैप्टिव बिजली संयंत्रों की अतिरिक्त क्षमता को ग्रिड में लाने से देश में बिजली की कुल उपलब्धता बढ़ेगी. इससे साल की अंतिम तिमाही में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है.

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