स्कूलों की बदहाली नहीं इस्लाम है जड़, फ्रांस के प्रदर्शनों पर ट्रंप बड़ा बयान

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Donald Trump on France protest: यूरोपीय फ्रांस में पिछले कुछ दिनों से छात्रों का बड़ा आंदोलन चल रहा है. स्कूलों की खराब हालत को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन हिस्सा लेने के लिए देश के कई शहरों में लाखों छात्र सड़कों पर उतरे. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रदर्शन को लेेकर ऐसा बयान दिया है, जो सुर्खियों में है. दरअसल ट्रंप ने इस पूरे आंदोलन को इस्लाम से जोड़ दिया है. ट्रंप ने कहा है कि इसके पीछे की मंशा फ्रांस पर इस्लामिक कब्जे की कोशिश है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि फ्रांस में जो हो रहा है, वह बेकाबू बड़े पैमाने पर प्रवासन का नतीजा है. उन्होंने लिखा कि ‘यह स्कूलों के बारे में नहीं है, यह इस्लाम की कोशिश है कि एक वक्त में महान रहे देश पर कब्जा कर लिया जाए.’ हालांकि ट्रंप का यह बयान प्रदर्शनकारियों की असली मांगों से मेल नहीं खाता लेकिन ये चर्चा खूब बटोर रहा है.

क्यों हो रहा है फ्रांस में प्रदर्शन?

बता दें कि फ्रांस में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है. यहां कक्षाओं में भीड़भाड़ खूब हो गई हैं, इमारतें जर्जर हो चुकी हैं और कई जगह स्कूल का दिन बहुत लंबा हो गया है. नर्सों और अन्य सहयोगी कर्मचारियों की भी कमी है. साथ ही प्रदर्शनकारियों का ये भी आरोप है कि शिक्षा पर पर्याप्त पैसा नहीं खर्च हो रहा, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है. प्रोटेस्टर्टस ने सरकार से शिक्षकों की भर्ती बढ़ाने, कक्षाओं में भीड़ कम करने और स्कूलों की मरम्मत के लिए पर्याप्त बजट देने की मांग की है.

ऐसे में 6 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन में गृह मंत्रालय के अनुसार करीब 2 लाख 56 हजार लोग शामिल हुए. छात्र और उनके संगठन साफ कहना हैं कि उनका आंदोलन शिक्षा की बेहतर सुविधाओं, शिक्षकों की कमी और स्कूलों की मरम्मत को लेकर है.

किन-किन शहरों में हुए प्रदर्शन?

17 सितंबर को पेरिस के क्रेतेइल शहर से शुरू हुआ यह प्रदर्शन तेजी से पूरे देश में फैल गया. मार्सिले, ल्योन, लिल, स्ट्रासबर्ग और टूर्स जैसे बड़े शहरों में भी छात्र सड़कों पर दिखे. कई स्कूलों में तालाबंदी हुई और कक्षाएं बाधित रहीं. इनमें सिर्फ पेरिस में करीब 56 हजार लोग थे. आयोजकों का दावा है कि पूरे देश में लगभग 4 लाख 50 हजार लोग सड़कों पर आए. ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ जगहों पर हिंसा भी हुई.
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