US-Iran War: दुनियाभर में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग और सैन्य टकराव चरम पर पहुंच गया है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने अमेरिकी नौसैनिक बेड़े पर सीधे हमले की चेतावनी दी है, जिसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कड़ा पलटवार करते हुए ईरान के दावों को खारिज कर दिया है.
होर्मुज़ में अमेरिकी नौसैनिक बेड़े का इंतजार
आईआरजीसी नौसेना के कमांडर ने कड़ा रुख अपनाते हुए बयान जारी किया कि वे होर्मुज़ स्ट्रेट में अमेरिकी नौसैनिक बेड़े की मौजूदगी का इंतजार कर रहे हैं ताकि उस पर हमला कर उसे समुद्र में डुबोया जा सके. इसके साथ ही रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने यह दावा भी दोहराया कि रणनीतिक रूप से संवेदनशील इस समुद्री मार्ग पर पूरी तरह से ईरान का नियंत्रण स्थापित है.
पोस्ट साझा कर तीखा जवाब
ईरान की इस सीधी चेतावनी के फौरन बाद अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा कर तीखा जवाब दिया. सेंटकॉम ने दावा किया कि ईरानी नेवी कमांडर के पास अब कोई प्रभावी नौसेना बची ही नहीं है. अमेरिकी कमान ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना और उसके क्षेत्रीय सहयोगी साझेदार पूरी तरह और स्पष्ट रूप से होर्मुज़ स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए हुए हैं.
होर्मुज़ स्ट्रेट के जरिए आगे रवाना
सेंटकॉम ने पुष्टि की कि महज एक दिन पहले ही अमेरिकी सेना की सुरक्षा में खाड़ी के सहयोगी देशों के लगभग 1.9 करोड़ बैरल कच्चे तेल को सुरक्षित रूप से होर्मुज़ स्ट्रेट के जरिए आगे रवाना कराया गया है. 28 फरवरी को अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त सैन्य हमलों के बाद से दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है. इस पूरे गतिरोध में होर्मुज़ स्ट्रेट सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बना हुआ है, क्योंकि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी संकरे समुद्री गलियारे से होकर गुजरता है.
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