US Russia deal : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रूसी डीजल के निर्यात को अनुमति देने, रूस पर कुछ प्रतिबंधों में छूट देने और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की आलोचना करने से दोनों सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ा है. इन घटनाओं से ऐसा संकेत मिलता है कि ट्रंप अब युद्ध को लेकर जेलेंस्की की रणनीति का समर्थन करने के बजाय उन पर समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं.
90 मिनट की फोन कॉल के बाद क्या बदला?
जेलेंस्की पर नाराजगी की वजह?
- ट्रंप और जेलेंस्की के बीच मतभेद केवल रूसी ईंधन तक सीमित नहीं हैं. दरअसल, अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने की दिशा में कदम उठाए, क्योंकि इन हमलों से रूस की ईंधन आपूर्ति प्रभावित होती है और कीमतें बढ़ सकती हैं.
- अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यूक्रेन के हमले जारी रहने के बाद ट्रंप ने रूस के साथ डीजल समझौता किया. वहीं दूसरी तरफ जेलेंस्की का आरोप है कि यूक्रेन ने अमेरिकी आग्रह पर ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की कोशिश की, लेकिन रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रखे.
- इसी वजह से उन्होंने रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले दोबारा शुरू करने की घोषणा की. यह टकराव दिखाता है कि दोनों देशों के बीच युद्ध रोकने की शर्तों पर सहमति नहीं बन पा रही है.
- ट्रंप ने यह भी कहा है कि पुतिन, जेलेंस्की के मुकाबले शांति समझौता करने के लिए अधिक इच्छुक दिखाई देते हैं. इस बयान से यूक्रेन की चिंता बढ़ी है, क्योंकि इससे युद्ध के लिए रूस के बजाय यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराने का राजनीतिक दबाव बन सकता है.
क्यों जेलेंस्की के पीछे ही पड़ गए ट्रंप?
- अमेरिका में ईंधन की कीमतों को कम करके घरेलू आर्थिक दबाव घटाना.
- रूस के साथ सीधे समझौते के जरिए युद्ध समाप्त करने की कोशिश करना.
- यूक्रेन पर ऐसी शर्तें स्वीकार करने का दबाव बनाना, जिन्हें अमेरिका शांति वार्ता के लिए जरूरी मानता है.

