France Protests: फ्रांस में बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन की लागत और युवाओं के भविष्य को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुका है, जिसका 17-18 अक्टूबर को सबसे भयानक रूप देखने को मिला. इस दौरान देश के कई शहरों में प्रदर्शनकारियों, पुलिस और लूटपाट करने वाले समूहों के बीच झड़पें हुईं. देखते ही देखते हालात इतने बिगड़ गए कि दुकानों में तोड़फोड़ की गई, सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया और कई जगहों पर पुलिस को आंसू गैस और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल करना पड़ा.
फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार की हिंसा के दौरान करीब 2400 लोगों को गिरफ्तार किया गया. वहीं, लगभग 1000 पुलिसकर्मी और जेंडरमेरी के जवान घायल हुए, जिनमें 7 की हालत गंभीर बताई गई. हालांकि संपत्ति को हुए कुल नुकसान का अंतिम आंकड़ा सामने नहीं आया है.
प्रदर्शनकारियों ओर पुलिस के बीच झड़प
बता दें कि राजधानी पेरिस में 18 अक्टूबर का दिन तनाव से भरा रहा. प्लास द ला रिपब्लिक इलाके में सोशल मीडिया के जरिए जुटे सैकड़ों लोगों और पुलिस के बीच टकराव हुआ. अधिकारियों के मुताबिक, इस सभा की अनुमति भी नहीं ली गई थी. इस दौरान, प्रदर्शनकारियों की तरफ से बोतलें और पत्थर फेंके गए, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया.
143 साल पुराने सिटी हॉल को किया आग के हवाले
इस दौरान हिंसा का सबसे गंभीर उदाहरण दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के लिमोज शहर में सामने आया. यहां 17 अक्टूबर को शहर के 143 साल पुराने सिटी हॉल में आग लगा दी गई, जिससे इमारत को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा और वह लगभग नष्ट हो गई. ऐसे में शहर के मेयर गिलौम गेरिन ने आरोप लगाया कि इमारत को जानबूझकर जलाया गया. उन्होंने कहा कि घटना के समय अंदर मौजूद लोगों की जान खतरे में पड़ गई.
इमरजेंसी आर्थिक पैकेज की घोषणा
इस दौरान मेयर ने चेतावनी दी कि यदि इमारत की मरम्मत के लिए पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं मिली, तो वह इस्तीफा देने पर विचार करेंगे. बोर्दो शहर के मेयर थॉमस काजेनाव के मुताबिक वहां करीब 100 दुकानों में लूटपाट हुई. वहीं मार्सेई के मेयर बेनोआ पायां ने हिंसा से प्रभावित कारोबारियों की मदद के लिए इमरजेंसी आर्थिक पैकेज की घोषणा की.
फ्रांस की प्रमुख खुदरा कंपनी कैरेफोर के सीईओ अलेक्जेंडर बोम्पार्ड ने बताया कि कंपनी के 50 स्टोर्स में काफी नुकसान हुआ, जिनमें से 20 में लूटपाट की गई. कंपनी को हुए नुकसान का अनुमान करोड़ों यूरो में बताया गया.
दंगाइयों को चुकानी होगी इसकी कीमत
इसी बीच, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी हिंसा की निंदा की. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों की जायज मांगों और तोड़फोड़ तथा लूटपाट करने वालों के बीच अंतर किया जाना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि हिंसा करने वाले दंगाइयों को इसकी कीमत चुकानी होगी.
मैक्रों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और सरकारी इमारतों, कारोबारियों तथा शहरों की सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर कदम उठाने का वादा किया. उन्होंने गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज से पुलिस की तैयारी और खुफिया जानकारी जुटाने में हुई कमियों की समीक्षा करने को भी कहा. हालांकि उन्होंने तत्काल आपातकाल या कर्फ्यू लगाने की घोषणा नहीं की लेकिन साफ कहा है कि हिसाब तो सबका होगा.

