Brazil Election Controversy: ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की जीत के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. विपक्षी खेमे के नेता फ्लावियो बोल्सोनारो ने शुरुआत में चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए उन्हें रद्द करने की मांग की थी. अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जैसे ही चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए, उनका रुख बदल गया. कल तक चुनावों को रद्द करने की मांग कर रही लिबरल पार्टी ने भी चुनाव परिणाम स्वीकार कर लिए.
अंतरराष्ट्रीय दबाव की भूमिका को लेकर चर्चा
इस घटनाक्रम ने ब्राजील की राजनीति में अमेरिकी समर्थन और अंतरराष्ट्रीय दबाव की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू कर दी. ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में ब्राजील के चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि लूला के साथ उनके अच्छे संबंध हैं लेकिन चुनाव कराने के तरीके और मतगणना की प्रक्रिया उन्हें ठीक नहीं लगी. ट्रंप ने मतदान का समय बढ़ाए जाने को भी असामान्य बताया. हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ब्राजील के चुनाव में हस्तक्षेप करना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा कि मैं ब्राजील नहीं चला रहा हूं, मैं अमेरिका चला रहा हूं.
कोई कदम उठाने के पक्ष में नहीं हैं ट्रंप
इस बयान को संकेत के रूप में देखा गया कि ट्रंप चुनाव परिणाम रद्द कराने के लिए कोई कदम उठाने के पक्ष में नहीं हैं. ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट के मुताबिक दूसरे चरण में लूला दा सिल्वा को 51.79 प्रतिशत वैध वोट मिले, जबकि बोल्सोनारो को 48.21 प्रतिशत वोट हासिल हुए. इस तरह लूला ने चुनाव जीत लिया. बोल्सोनारो ने मतदान का समय बढ़ाए जाने के फैसले पर आपत्ति जताई थी. उनका आरोप था कि इस फैसले से मतदाताओं के साथ समान व्यवहार नहीं हुआ.
पहले यातायात संबंधी दिक्कतों का हवाला
हालांकि मतदान का समय बढ़ाने का फैसला सार्वजनिक परिवहन की समस्याओं और भारी बारिश जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया गया था. लूला की पार्टी ने पहले यातायात संबंधी दिक्कतों का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय मांगा था. बाद में बोल्सोनारो की पार्टी भी इस रिक्वेस्ट में शामिल हो गई. बोल्सोनारो ने अपने वीडियो संदेश में स्पष्ट रूप से हार स्वीकार नहीं की लेकिन कहा कि वह संसद में विपक्ष का नेतृत्व करेंगे. उन्होंने कहा कि वह विपक्ष को संगठित करेंगे और संसद के निचले सदन तथा सीनेट में अपनी ताकत का इस्तेमाल करेंगे.
सवालों पर लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा
उनकी पार्टी ने भी चुनाव परिणाम स्वीकार करते हुए कहा कि उठाए गए सवालों पर लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा होनी चाहिए. इस तरह चुनाव रद्द कराने की मांग पीछे हट गई, लेकिन राजनीतिक विरोध खत्म नहीं हुआ.
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