Neeraj Yadav: एशियाई पैरा खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर पहचान बनाने वाले पैरा एथलीट नीरज यादव की मौत ने खेल जगत को झकझोर दिया है. उनकी मौत के मामले में पुलिस कई पहलुओं की जांच कर रही है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नीरज कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खाने के बाद मृत पाए गए थे. बताया जा रहा है कि डोपिंग के कारण लगे प्रतिबंध ने उनके खेल करियर को बड़ा नुकसान पहुंचाया था. इसके अलावा, एक महिला के साथ उनके संबंधों में आई दूरी को भी संभावित पहलू के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, उनकी मौत के पीछे की असल वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है.
महिला से मुलाकात के बाद सामने आया पूरा घटनाक्रम
पुलिस के मुताबिक, Neeraj Yadav को अस्पताल पहुंचाने वाली महिला ने पूछताछ में बताया कि दिसंबर 2025 से उसकी नीरज से दोस्ती थी. मंगलवार को वह उनसे मिलने हरियाणा के सोनीपत गई थी. महिला के अनुसार, मुलाकात के दौरान उसने नीरज से कहा कि वह अब उनके संपर्क में नहीं रह सकती. बताया गया कि इसके बाद नीरज महिला को अपनी स्कॉर्पियो कार से दिल्ली के मौजपुर इलाके में छोड़ने पहुंचे. रात करीब नौ बजे महिला को किसी अनहोनी की आशंका हुई. वह मौजपुर मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर एक के पास पहुंची, जहां नीरज अपनी कार के नजदीक सड़क पर पड़े मिले.
महिला उन्हें अस्पताल लेकर गई, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस इस मामले की जांच भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत कर रही है. फिलहाल, महिला के बयान और घटनाक्रम के आधार पर जांच की जा रही है. मौत के पीछे प्रेम प्रसंग की भूमिका होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है.
डोपिंग बैन ने छीन लिए दो गोल्ड मेडल Neeraj Yadav
Neeraj Yadav का खेल करियर उपलब्धियों से भरा रहा था. उन्होंने एशियाई पैरा खेलों में कुल तीन स्वर्ण पदक जीते थे. साल 2018 में जकार्ता में उन्होंने भाला फेंक स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल किया था. इसके बाद 2023 में चीन के हांगझोउ में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने भाला फेंक और चक्का फेंक, दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते. हालांकि, 2023 में डोपिंग मामले में दोषी पाए जाने के बाद उनके करियर को बड़ा झटका लगा. प्रतिबंधित पदार्थ के सेवन के मामले में उन पर चार साल का प्रतिबंध लगाया गया. इसके बाद हांगझोउ में जीते गए उनके दोनों स्वर्ण पदक वापस ले लिए गए. इस कार्रवाई के कारण नीरज आगामी आइची-नागोया एशियाई पैरा खेलों में भी हिस्सा नहीं ले सकते थे. उनकी खेल गतिविधियों पर लगी रोक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी की संभावनाओं को भी प्रभावित किया.
करोड़ों की पुरस्कार राशि और सरकारी नौकरी भी गंवाई
नीरज के भारतीय पैरा-एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच एस. सत्यनारायण के मुताबिक, डोपिंग विवाद के बाद खिलाड़ी को आर्थिक और मानसिक स्तर पर काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था. कोच ने पीटीआई को बताया कि हांगझोउ में दो स्वर्ण पदक जीतने के बाद नीरज को उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी मिलने की उम्मीद थी. इसके अलावा, उन्हें तीन करोड़ रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि भी मिलने वाली थी. लेकिन डोपिंग मामले में पदक छिनने के बाद इन लाभों से भी उन्हें हाथ धोना पड़ा. सत्यनारायण के अनुसार, नीरज के कई साथी खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी मिल चुकी थी. ऐसे में नीरज के लिए यह स्थिति और कठिन रही होगी. हालांकि, इन परिस्थितियों का उनकी मौत से सीधा संबंध था या नहीं, यह अभी जांच का विषय है.
कोच ने बताया, कई महीनों से तनाव में थे नीरज
भारतीय पैरा-एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच एस. सत्यनारायण ने नीरज की मौत पर गहरा दुख जताया. उन्होंने कहा कि डोपिंग मामले में नाम आने के बाद से वह लगातार नीरज के संपर्क में थे. कोच के मुताबिक, कुछ महीने पहले नीरज ने उनसे पूछा था कि क्या वह आइची-नागोया एशियाई पैरा खेलों के चयन ट्रायल में हिस्सा ले सकते हैं. सत्यनारायण ने उन्हें बताया था कि प्रतिबंध की अवधि पूरी नहीं होने के कारण वह ट्रायल में भाग नहीं ले सकते. कोच ने कहा कि डोपिंग मामले के बाद नीरज काफी तनाव में थे. उनके अनुसार, पदक खोना, पुरस्कार राशि नहीं मिलना और सरकारी नौकरी की उम्मीद टूटना उनके लिए बड़े झटके थे. हालांकि, सत्यनारायण ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें नीरज के इस कदम के सटीक कारणों की जानकारी नहीं है.
उन्होंने यह भी कहा कि नीरज खेल से जुड़े दूसरे विकल्पों, जैसे कोचिंग, के जरिए अपना करियर आगे बढ़ा सकते थे. लेकिन उनकी मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी.
सात साल की उम्र में हुआ पोलियो
नीरज यादव की जिंदगी संघर्ष और उपलब्धियों की कहानी रही है. उन्हें सात साल की उम्र में पोलियो हो गया था. इसके बावजूद उन्होंने खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया. शुरुआत में उन्होंने व्हीलचेयर टेनिस खेला, लेकिन बाद में पैरा-एथलेटिक्स की ओर रुख किया. उन्होंने भाला फेंक और चक्का फेंक जैसी स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा साबित की और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया. 2018 और 2023 के एशियाई पैरा खेलों में मिली सफलता ने उन्हें देश के प्रमुख पैरा खिलाड़ियों में शामिल कर दिया था. नीरज सोनीपत में अंशनीर स्पोर्ट्स अकादमी नाम से ऑनलाइन खेल अकादमी भी चलाते थे. वह विवाहित थे और उनके परिवार में पत्नी तथा तीन साल की बेटी हैं.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होंगे मौत के कारण
पुलिस फिलहाल नीरज की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है. उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल ले जाया गया था. जहरीले पदार्थ के सेवन की बात सामने आई है, लेकिन किस पदार्थ का सेवन हुआ और मौत की परिस्थितियां क्या थीं, इसकी पुष्टि मेडिकल जांच के बाद ही हो सकेगी. कोच सत्यनारायण ने भी कहा कि नीरज ने जहरीला पदार्थ खाया था, लेकिन उसकी प्रकृति की जानकारी पोस्टमार्टम के बाद ही मिल सकती है.
फिलहाल, डोपिंग प्रतिबंध, आर्थिक नुकसान और महिला के साथ संबंधों में आई दूरी जैसे पहलुओं की चर्चा हो रही है. हालांकि, इनमें से किसी भी कारण को उनकी मौत की निश्चित वजह नहीं माना जा सकता. पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मामले की वास्तविक परिस्थितियों पर स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी.

